निवेशकों के अरबों डॉलर स्वाहा—क्या यह 'ब्लैक फ्राइडे' धातुओं के भविष्य को बदल देगा?

न्यूयॉर्क/मुम्बई: वैश्विक कमोडिटी बाजार में आज उस समय हड़कंप मच गया जब चांदी की कीमतों में 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई। महज कुछ ही घंटों के भीतर चांदी के वायदा भाव 31.4% तक टूट गए, जिसने निवेशकों के पोर्टफोलियो में तबाही मचा दी है। यह गिरावट इतनी तीव्र थी कि विशेषज्ञों ने इसकी तुलना चार दशक पहले के उस ऐतिहासिक संकट से कर दी है जिसने बाजार की दिशा बदल दी थी।

फेडरल रिजर्व के नए नामांकन ने बदला हवा का रुख

इस भारी उथल-पुथल की जड़ में वाशिंगटन से आई एक बड़ी खबर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में नामित किए जाने के फैसले ने वैश्विक बाजारों को हिला कर रख दिया है। वॉर्श को आर्थिक हलकों में एक 'इन्फ्लेशन हॉक' (महंगाई के प्रति सख्त रुख रखने वाला) माना जाता है।

इस नामांकन ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिनमें बाजार यह मानकर चल रहा था कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती होगी और डॉलर कमजोर होगा। इसके विपरीत, वॉर्श की नियुक्ति के संकेत देते ही डॉलर में मजबूती आई और चांदी के सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षण में भारी कमी आई।

बाजार का विश्लेषण: आंकड़ों की जुबानी तबाही का मंजर

गुरुवार को चांदी $114 प्रति औंस के ऊपर बंद हुई थी, लेकिन शुक्रवार का सूरज ढलते-ढलते इसकी चमक फीकी पड़ गई और यह **$78.53 प्रति औंस** पर सिमट गई।

बाजार में मची इस अफरा-तफरी के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मूल्य में गिरावट: चांदी की कीमतों में एक ही दिन में 31.4% की ऐतिहासिक गिरावट।
  • बाजार मूल्य का नुकसान: धातुओं के पूरे बाजार से अनुमानित $7 ट्रिलियन से $15 ट्रिलियन की मार्केट वैल्यू पूरी तरह साफ हो गई।
  • गोल्ड का हाल: चांदी के साथ-साथ सोने ने भी घुटने टेक दिए; सोना 11.4% गिरकर $4,745 के स्तर पर आ गया।

जबरन बिक्री (Forced Selling): कीमतों में अचानक आई इस गिरावट ने 'मार्जिन कॉल्स' को जन्म दिया, जिससे निवेशकों को घाटे में अपनी पोजीशन काटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

विशेषज्ञों की राय: एक 'क्लासिक डिलीवरेजिंग' घटना

बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि जनवरी महीने में चांदी ने $122 के रिकॉर्ड स्तर को छूकर जो रैली दिखाई थी, उसके बाद यह सुधार अनिवार्य था, लेकिन इसकी तीव्रता ने सबको चौंका दिया है। इसे एक 'क्लासिक डिलीवरेजिंग' (Deleveraging) घटना कहा जा रहा है, जहां अत्यधिक कर्ज या मार्जिन पर किए गए सौदे ताश के पत्तों की तरह ढह गए।

केविन वॉर्श की सख्त मौद्रिक नीतियों की संभावना ने निवेशकों को कीमती धातुओं से हटकर डॉलर और बॉन्ड्स की ओर रुख करने पर मजबूर कर दिया है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया और भविष्य की राह

हालांकि फेडरल रिजर्व या ट्रेजरी विभाग की ओर से बाजार की इस अस्थिरता पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी सुधार नहीं है। यदि केविन वॉर्श के नेतृत्व में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रखने का फैसला करता है, तो आने वाले हफ्तों में धातुओं की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

एक ऐतिहासिक सबक

आज की इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैश्विक भू-राजनीति और केंद्रीय बैंकों के फैसले किस तरह रातों-रात बाजार की तकदीर बदल सकते हैं। 1980 के बाद का यह सबसे काला दिन निवेशकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता की कोई सीमा नहीं होती।

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