भारत में तुर्की की बड़ी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी का कामकाज कैसे हुआ बंद? तुर्की की डायरेक्टर का दर्दनाक खुलासा|
17 साल पुरानी कंपनी सेलेबी एविएशन की सिक्योरिटी क्लीयरेंस रद्द होने के बाद भारत में अपना कारोबार कैसे खो दिया, विस्तार से जानें।

सेलेबी होल्डिंग की डायरेक्टर कनान सेलेबिओग्लू एक इंटरव्यू में भारत में कंपनी का कारोबार बंद होने के अनुभवों पर चर्चा कर रही हैं।
तुर्की की प्रमुख एविएशन ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी 'सेलेबी एविएशन' का भारत से 17 वर्षों पुराना व्यावसायिक सफर मई 2025 में अचानक समाप्त हो गया। कंपनी की चेयरपर्सन कनान सेलेबिओग्लू ने एक हालिया साक्षात्कार में भारत में अपने संचालन के बंद होने की पीड़ा साझा की। 400 से 500 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई इस कंपनी का कामकाज रातों-रात सरकारी आदेशों के बाद पूरी तरह बंद हो गया था। यह घटना भारत के विमानन क्षेत्र में विदेशी निवेश और परिचालन सुरक्षा मानकों के संदर्भ में एक बड़ी चर्चा का विषय बनी रही।
इस संपूर्ण घटनाक्रम का मूल कारण भारतीय गृह मंत्रालय की सिफारिश पर नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा कंपनी की सिक्योरिटी क्लीयरेंस को रद्द करना था। किसी भी हवाई अड्डे के रनवे या कार्गो क्षेत्र में काम करने के लिए अनिवार्य इस क्लीयरेंस के बिना, कंपनी का परिचालन तत्काल प्रभाव से रुक गया। इस कार्रवाई के पीछे एक विवादास्पद अफवाह ने बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें दावा किया गया था कि सेलेबी एविएशन में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के परिवार का निवेश है। हालाँकि, कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इन वित्तीय संबंधों के आरोपों को सिरे से खारिज किया था, लेकिन तब तक प्रशासनिक निर्णय लिया जा चुका था।
परिचालन बंद होने का प्रभाव देश के प्रमुख हवाई अड्डों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद पर पड़ा। सेलेबी भारत की सबसे बड़ी ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो कंपनियों में से एक थी, जिसके अचानक हटने से उड़ानों के प्रबंधन में बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके तहत कंपनी के 10,000 से अधिक कर्मचारियों को अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया ताकि हवाई अड्डों का कामकाज बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।
कनान सेलेबिओग्लू के अनुसार, उन्होंने भारत में कंपनी को बड़ी मेहनत से खड़ा किया था और वे इसे अपना दूसरा घर मानती थीं। उन्होंने कहा कि 17 वर्षों की इस लंबी यात्रा में उन्होंने न केवल व्यापार का विस्तार किया बल्कि सरकार के साथ मिलकर नीतिगत बदलावों और एविएशन सेक्टर के विकास के लिए भी प्रयास किए थे। कानूनी लड़ाई के स्तर पर भी कंपनी को असफलता मिली, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा, जिससे उनके व्यावसायिक परिचालन की वापसी की सभी संभावनाएं समाप्त हो गईं। यह मामला विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में नियामक अनुपालन और सुरक्षा क्लीयरेंस की कठोरता को प्रदर्शित करता है, जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को सर्वोपरि मानते हुए कड़े निर्णय लिए जाते हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
