Budget 2026 : मंदिर-मठों के संरक्षण पर सरकार का बड़ा दांव; 'बौद्ध सर्किट' के जरिए चीन को सांस्कृतिक जवाब?
Budget 2026 विशेष रिपोर्ट: वित्त मंत्री ने पूर्वोत्तर के 6 राज्यों के लिए 'बौद्ध सर्किट' योजना का ऐलान किया है। इस पहल के तहत प्राचीन मंदिर-मठों का संरक्षण होगा और 10,000 नए गाइड्स को रोजगार मिलेगा। जानिए कैसे अरुणाचल से त्रिपुरा तक बदलेगी पर्यटन की सूरत और क्या है सरकार का नया 'सांस्कृतिक कॉरिडोर' प्लान।

Employment in tourism sector Budget 2026 : 1 फरवरी 2026 की सुबह जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना 9वां बजट पेश करने पहुँचीं, तो देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को एक नई संजीवनी मिलने की उम्मीद जग गई। 'विकास भी, विरासत भी' के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए इस बजट में पूर्वोत्तर भारत (Northeast) के लिए एक क्रांतिकारी 'बौद्ध सर्किट कॉरिडोर' का ऐलान किया गया है। यह योजना न केवल प्राचीन मंदिर-मठों को नई पहचान देगी, बल्कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पूर्वोत्तर के राज्यों को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर देगी।
आस्था और बुनियादी ढांचे का संगम: बौद्ध सर्किट योजना
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता उन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों का संरक्षण करना है जो समय की मार और उपेक्षा का दंश झेल रहे थे। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।
इस योजना के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:
- मठों और मंदिरों का कायाकल्प: सदियों पुराने बौद्ध मठों और हिंदू मंदिरों का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण किया जाएगा ताकि उनकी मौलिकता बनी रहे।
- 4000 ई-बसों का बेड़ा: दुर्गम इलाकों में तीर्थयात्रियों की सुगम और पर्यावरण-अनुकूल आवाजाही के लिए सरकार 4000 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करेगी।
- तीर्थयात्री व्याख्या केंद्र: पर्यटकों को इन स्थलों के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को समझाने के लिए अत्याधुनिक 'इंटरप्रिटेशन सेंटर्स' (Interpretation Centres) स्थापित किए जाएंगे।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: सुगम सड़कों और डिजिटल कनेक्टिविटी के माध्यम से इन राज्यों के पर्यटन स्थलों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
सांस्कृतिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार :
ज्योतिषाचार्यों और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा धर्म और आस्था के प्रति दिखाया गया यह सम्मान देश में शांति और स्थिरता का संचार करेगा। पूर्वोत्तर भारत, जो थेरवाद और महायान परंपराओं का संगम स्थल रहा है, अब अपनी उस थाती को दुनिया के सामने और अधिक मजबूती से पेश कर सकेगा। यह कॉरिडोर न केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा करेगा।
आधिकारिक घोषणा और प्रभाव :
बजट 2026 के माध्यम से सरकार ने 'पूर्वोदय' के अपने संकल्प को दोहराया है। यह योजना आगामी वित्तीय वर्ष से प्रभावी होगी, जिसका सीधा लाभ उन पांच राज्यों को मिलेगा जहाँ धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। तवांग से लेकर रुमटेक तक, अब हर मठ आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जो विदेशी पर्यटकों और शोधकर्ताओं को भारत की ओर आकर्षित करेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
