गिग इकोनॉमी और महिला कार्यबल; क्या ब्रिक्स की नई रणनीति बदलेगी श्रमिकों की किस्मत?
भारत की अध्यक्षता में 11 देशों के प्रतिनिधि वैश्विक श्रम बाजार को औपचारिक बनाने और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर चर्चा करेंगे।

कतार में लगे ब्रिक्स सदस्य देशों के ध्वज तिरुवनंतपुरम में आयोजित रोजगार कार्य समूह बैठक के दौरान दिख रहे हैं।
BRICS Employment Working Group meeting Thiruvananthapuram : वैश्विक अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार की दिशा तय करने वाले शक्तिशाली समूह 'ब्रिक्स' की अध्यक्षता वर्ष 2026 में भारत के हाथों में है, और इसी कड़ी में केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम एक ऐतिहासिक कूटनीतिक आयोजन का गवाह बनने जा रही है। आगामी 6-7 मई 2026 को आयोजित होने वाली ब्रिक्स रोजगार कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) की दूसरी बैठक ने न केवल भारत बल्कि वैश्विक मंच पर भी हलचल पैदा कर दी है। इस उच्च-स्तरीय शिखर बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य देशों—सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात—के श्रम एवं रोजगार कल्याण से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधि एक छत के नीचे बैठकर दुनिया के करोड़ों श्रमिकों के भविष्य की रूपरेखा तैयार करेंगे। यह आयोजन उस समय हो रहा है जब तकनीकी बदलावों और डिजिटल युग ने काम की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है।
यह बैठक 16-17 मार्च को आयोजित हुई पहली वर्चुअल बैठक की सफलताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगी। इस महामंथन का मुख्य केंद्र बिंदु सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ बनाना और श्रम बाजारों के औपचारिकीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाना है। सदस्य देश इस मंच का उपयोग डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और अंतरसंचालनीय डिजिटल समाधानों की शक्ति को समझने के लिए करेंगे, ताकि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित हर श्रेणी के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा के लाभ सुगमता से पहुंच सकें। चर्चा का एक बड़ा हिस्सा कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी और उनके समावेश को बढ़ाने पर केंद्रित होगा, जिसमें सदस्य देश उन बाधाओं को दूर करने के लिए अपनी सफल नीतियों का आदान-प्रदान करेंगे जिन्होंने लंबे समय से कार्यस्थलों में महिलाओं की पूर्ण क्षमता को बाधित कर रखा है।
रणनीतिक रूप से यह बैठक भविष्य की कौशल आवश्यकताओं और रोजगार सृजन की क्षमता पर भी गहरा प्रकाश डालेगी। बदलती कामकाजी संस्कृति के बीच डिजिटल कौशल को निखारना और ब्रिक्स देशों के बीच श्रम बाजार की मांग और कार्यबल की क्षमताओं के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करना इस वार्ता के मूल में है। इस वैश्विक संवाद में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (ISSA) जैसे दिग्गज संगठन अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगे, जिससे चर्चा को एक व्यापक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य प्राप्त होगा। संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय की उपस्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि यहाँ लिए गए निर्णय न केवल ब्रिक्स देशों बल्कि वैश्विक श्रम मानकों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
तिरुवनंतपुरम में होने वाला यह दो दिवसीय विचार-विमर्श उन परिणामों की व्यापक रूपरेखा तैयार करेगा जिन्हें तीसरी ईडब्ल्यूजी बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा। अंततः, इन लक्ष्यों को इसी वर्ष जुलाई में होने वाली ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में आधिकारिक स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह बैठक महज एक कूटनीतिक संवाद नहीं है, बल्कि भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स देशों के बीच एक सुसंगत, दूरदर्शी और पारस्परिक रूप से लाभकारी श्रम पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। तिरुवनंतपुरम से निकलने वाला यह संदेश दुनिया को बताएगा कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं अब वैश्विक रोजगार नीति के केंद्र में अपनी जगह पक्की कर चुकी हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
