अब ब्लू इकोनॉमी होगी ग्रीन; मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 लॉन्च
भारत सरकार ने ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के जरिए समुद्री क्षेत्र को हरित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ईंधन, आधुनिक बंदरगाह और बड़े निवेश से भारत वैश्विक समुद्री शक्ति बनने की ओर अग्रसर है।

maritime india vision 2030 green hydrogen ports
maritime india vision 2030 green hydrogen ports : भारत एक ऐसे समुद्री परिवर्तन के दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां आर्थिक विस्तार और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक बनते नजर आ रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश अब अपनी लंबी समुद्री सीमा, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और बढ़ती औद्योगिक क्षमता का उपयोग केवल व्यापार और संपर्क बढ़ाने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि समुद्री क्षेत्र को हरित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाने को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बना रहा है।
इसी दिशा में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ को अंतिम रूप दिया है। यह विजन भारत के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का रोडमैप पेश करता है। मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में समुद्री परिवहन का भविष्य पारंपरिक ईंधनों से आगे बढ़कर ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया, बायोफ्यूल और एलएनजी जैसे स्वच्छ विकल्पों पर आधारित होगा।
सरकार ने इस बदलाव को गति देने के लिए राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में ठोस कदम उठाना और भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। वर्ष 2030 तक हर साल 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने, 6 लाख रोजगार सृजित करने और ईंधन आयात में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य तय किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत कांडला, पारादीप और तूतीकोरिन जैसे प्रमुख बंदरगाहों को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
सरकार यहीं नहीं रुकी है। दीर्घकालिक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ भी तैयार किया गया है, जिसके अंतर्गत बंदरगाहों, तटीय जहाजरानी, अंतर्देशीय जलमार्गों और हरित शिपिंग परियोजनाओं में लगभग 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। इस विजन में ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण, बड़े बंदरगाहों पर ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ईंधन भरने की सुविधा और मेथनॉल से चलने वाले जहाजों को प्रोत्साहन देने जैसे कदम शामिल हैं।
इसके साथ ही ‘हरित सागर ग्रीन पोर्ट गाइडलाइंस 2023’, ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन 2023’, ‘ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम 2024’ और 25,000 करोड़ रुपये के मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड जैसी पहलों के जरिए बंदरगाहों और जहाजरानी उद्योग को पर्यावरण के अनुरूप ढालने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत दुनिया की प्रमुख समुद्री और जहाज निर्माण शक्तियों में शामिल हो।
इन पहलों के जरिए न केवल स्वच्छ और आधुनिक बंदरगाह विकसित होंगे, बल्कि कम प्रदूषण वाले जहाजों और टिकाऊ समुद्री अवसंरचना के माध्यम से भारत वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था में एक जिम्मेदार और मजबूत शक्ति के रूप में उभरेगा।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
