दलाल स्ट्रीट पर 'ब्लडबाथ': सेंसेक्स 2400 अंक टूटा; जाने निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ कैसे हो गये स्वाहा ?
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 2,400 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे। मिडिल ईस्ट युद्ध और तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों के 12 लाख करोड़ रुपये डूबे।

Stock Market Down
Iran Israel War Impact on Stock Market : भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में आज का दिन किसी डरावने सपने से कम साबित नहीं हुआ। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों ने दलाल स्ट्रीट पर ऐसी तबाही मचाई कि महज 10 मिनट के भीतर निवेशकों की करीब 12.39 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति राख हो गई। सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला, चौतरफा बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 मनोवैज्ञानिक स्तर 24,000 के नीचे फिसल गया, जबकि सेंसेक्स में 2,400 अंकों से अधिक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। दोपहर तक स्थिति यह थी कि बाजार का कुल पूंजीकरण घटकर 437 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों के चरम भय को दर्शाता है।
बाजार में मची भगदड़: प्रमुख कारण और वैश्विक दबाव :
इस महा-गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया 'ज्वालामुखी' है। ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच संघर्ष दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य—जहाँ से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति होती है—पूरी तरह बाधित होने की कगार पर है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें रातों-रात $118 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब तेल ने इस स्तर को छुआ है। तेल के इस झटके ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता को उजागर किया है, बल्कि रुपये को भी धूल चटा दी है। सोमवार को भारतीय रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर 92.52 प्रति डॉलर पर जा गिरा, जिससे आयात और भी महंगा होने का खतरा पैदा हो गया है।
बाजार में आई इस सुनामी के पीछे पांच प्रमुख स्तंभ रहे हैं :
- युद्ध का विकराल रूप: तेहरान में तेल डिपो पर हुए हमलों और ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए गए ड्रोन हमलों ने निवेशकों के बीच किसी भी राजनयिक समाधान की उम्मीद को खत्म कर दिया है।
- विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन: मार्च के पहले सप्ताह में ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 21,800 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिक्री की है, जिससे घरेलू बाजार में नकदी का संकट गहरा गया है।
- वैश्विक बाजारों में हाहाकार: भारत ही नहीं, बल्कि समूचा एशिया और पश्चिमी बाजार लाल निशान में डूबे हैं। जापान का निक्केई 6% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8% तक टूट गया, जिसने भारतीय सेंटिमेंट को और कमजोर किया।
- मुद्रा का अवमूल्यन: डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अस्थिरता और बढ़ सकती है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा के अनुसार, "निकट भविष्य में बाजार की दिशा पूरी तरह से बाहरी कारकों और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।" वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट के मुख्य रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने चेतावनी दी है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है। तकनीकी रूप से, निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण समर्थन बना हुआ है, लेकिन यदि भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में गिरावट के नए दौर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
