दलाल स्ट्रीट पर 'Black Friday': निफ्टी 25,700 के नीचे फिसला; 7 लाख करोड़ की संपत्ति स्वाहा
शेयर बाजार में आज भारी गिरावट! डोनाल्ड ट्रम्प के रूस प्रतिबंध अधिनियम और भारत पर 500% संभावित टैरिफ की खबरों के बीच सेंसेक्स 623 अंक टूटा और निफ्टी 25,700 के नीचे फिसला। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। जानिए क्या निफ्टी को मिलेगा 25,700 पर सपोर्ट या जारी रहेगी यह बड़ी गिरावट।

Sensex and Nifty crash today : भारतीय शेयर बाजार में आज उस समय हड़कंप मच गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों और 'रूस प्रतिबंध अधिनियम' की खबरों ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जहां सेंसेक्स 623.78 अंक या 0.74 प्रतिशत गिरकर 83,557.18 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, व्यापक बाजार सूचकांक निफ्टी ने भी 25,700 का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ दिया और 191.30 अंकों की गिरावट के साथ 25,685.55 पर आ गया। यह लगातार पांचवां सत्र है जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ है, जिसने निवेशकों के आत्मविश्वास को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है।
बाजार में इस प्रलयंकारी गिरावट की मुख्य जड़ वाशिंगटन से उठी उन लहरों में छिपी है, जहां राष्ट्रपति ट्रम्प ने नई दिल्ली द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के विरोध में भारतीय वस्तुओं पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने व्हाइट हाउस में हुई बैठक के बाद स्पष्ट किया कि यह नया प्रतिबंध विधेयक ट्रम्प प्रशासन को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने के लिए "जबरदस्त दबाव" बनाने का अधिकार देगा। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाजार से अपने हाथ खींच लिए हैं। अकेले गुरुवार को ही विदेशी फंडों ने 3,367.12 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की, जिससे स्थानीय बाजार में नकदी का संकट और गहरा गया।
कानूनी मोर्चे पर, वैश्विक वित्तीय जगत की निगाहें अब अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हैं, जो ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ की वैधता पर आना है। यदि न्यायालय इन शुल्कों को अवैध घोषित करता है, तो अमेरिकी सरकार को आयातकों को लगभग 150 अरब डॉलर वापस करने पड़ेंगे, जिससे भारत जैसे देशों को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपया भी अपने सबसे निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है, जो शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले गिरकर 89.97 के स्तर को छू गया। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 0.53 प्रतिशत की वृद्धि ने मुद्रास्फीति के जोखिम को बढ़ा दिया है, जिसने बाजार की गिरावट में आग में घी का काम किया है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी ने अपने 50-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (25,911) जैसे महत्वपूर्ण सुरक्षा स्तरों को तोड़ दिया है, जो भविष्य में और बड़ी गिरावट का संकेत दे सकता है। वर्तमान में बाजार का रुझान पूरी तरह नकारात्मक है, जहां लगभग 1959 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। आज की इस गिरावट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक व्यापार नीतियां और अमेरिकी प्रशासन का कड़ा रुख भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की दिशा ही यह तय करेगी कि दलाल स्ट्रीट पर छाये ये काले बादल कब छंटेंगे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
