नई दिल्ली | 20 मार्च, 2026

डिजिटल दौर में जहां हर चीज एक क्लिक पर उपलब्ध है, वहीं ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदने वाले ग्राहकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। हाल ही में 'लोकलसर्कल्स' (LocalCircles) द्वारा किए गए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन बीमा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले 10 में से 8 से ज्यादा लोग 'डार्क पैटर्न्स' यानी धोखाधड़ी वाली डिजिटल चालों का शिकार हो रहे हैं। ग्राहकों ने बताया कि उन्हें सब्सक्रिप्शन के जाल में फंसाने, बार-बार फोन कॉल से परेशान करने और उनकी मर्जी के बिना कुछ और थमा देने जैसे कड़वे अनुभव हुए हैं।

क्या है डार्क पैटर्न? डिजिटल युग का नया मायाजाल

डार्क पैटर्न असल में कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक ऐसी डिजिटल रणनीति है, जिसका मकसद ग्राहकों को गुमराह करना होता है। इसमें वेबसाइट या ऐप के डिजाइन को इस तरह बनाया जाता है कि ग्राहक न चाहते हुए भी किसी ऐसी सर्विस को चुन ले या खरीद ले, जिसकी उसे जरूरत नहीं थी। शुरू में कंपनियां बड़ी लुभावनी बातें करती हैं, लेकिन एक बार ग्राहक उनके जाल में फंस जाए, तो उसकी मर्जी के विपरीत उससे काम करवाए जाते हैं। जब तक ग्राहक को इस चालाकी का पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े: तेजी से बढ़ी धोखाधड़ी

पिछले 24 महीनों के दौरान ऑनलाइन इंश्योरेंस सेक्टर में ग्राहकों के साथ होने वाली बदसलूकी और धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल आया है:

• सब्सक्रिप्शन ट्रैप: ऑनलाइन बीमा खरीदने के बाद उसे कैंसिल करना अब पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल हो गया है। सर्वे के अनुसार, ऐसे लोगों की संख्या 61% से बढ़कर 80% हो गई है, जो पॉलिसी कैंसिल करने की प्रक्रिया में फंस गए।

• दबाव वाला रवैया: पिछले 24 महीनों में उन ग्राहकों की संख्या भी 57% से बढ़कर 85% हो गई है, जिन्होंने कंपनियों के दबाव वाले व्यवहार का सामना किया।

• नैगिंग (बार-बार परेशान करना): लगभग 90% ग्राहक कंपनियों के बार-बार आने वाले कॉल्स और मैसेज से परेशान हैं। इसे तकनीकी भाषा में 'नैगिंग' कहा जाता है।

निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल (Data Privacy Violation)

सर्वे में सबसे गंभीर मुद्दा ग्राहकों की प्राइवेसी यानी निजी जानकारी के साथ खिलवाड़ का सामने आया है। 85% ग्राहकों ने बताया कि उनकी पर्सनल डिटेल्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनियों के पास डेटा पहुंचने के बाद ग्राहकों को बिना मांगे फालतू मैसेज, प्रमोशनल ईमेल और कॉल भेजे जाते हैं। कई मामलों में तो यह डेटा तीसरे पक्ष (Third Party) को भी साझा किए जाने की आशंका जताई गई है।

लोकलसर्कल्स सर्वे के मुख्य बिंदु एक नजर में:


समस्या

ग्राहकों का प्रतिशत

ऑनलाइन इंश्योरेंस कंपनियों की चालाकी (डार्क पैटर्न)

80% से अधिक

पॉलिसी कैंसिल करने में आने वाली दिक्कत

80%

निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल और अनचाहे मैसेज

85%

बार-बार कॉल और मैसेज (नैगिंग) से परेशानी

90%

ऑनलाइन बीमा कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया है कि पॉलिसी खरीदना तो बहुत आसान है, लेकिन उसे बंद करना या ऑटो-डेबिट (Auto-debit) को रोकना बहुत कठिन है। इसे ही 'सब्सक्रिप्शन ट्रैप' कहा जाता है। ग्राहक चाहकर भी अपनी सदस्यता खत्म नहीं कर पाता और उसके बैंक खाते से पैसे कटते रहते हैं।

ग्राहकों के लिए सुझाव

ऑनलाइन इंश्योरेंस लेते समय केवल कम प्रीमियम न देखें, बल्कि उस कंपनी के 'कैंसिलेशन टर्म्स' और 'डेटा प्राइवेसी पॉलिसी' को भी ध्यान से पढ़ें। किसी भी लुभावने विज्ञापन या कॉल के झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा न करें। डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए हमेशा रजिस्टर्ड और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही चुनाव करें।


डिस्क्लेमर: यह खबर केवल सामान्य जानकारी है, वित्तीय सलाह नहीं; बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिमों को देखते हुए निवेश का निर्णय अपने सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह पर ही लें।

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