ANRF Convergence Research Centers : भारत को साल 2047 तक एक पूर्ण विकसित, आत्मनिर्भर और नवाचार-आधारित राष्ट्र बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी वैज्ञानिक कदम उठाया है। अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने जटिल सामाजिक, आर्थिक और विकासात्मक चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए 'अभिसरण अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र' (सीओई) कार्यक्रम के तहत देश के 10 शीर्ष संस्थानों का चयन किया है। विज्ञान जगत से आ रही यह खबर इसलिए अभूतपूर्व है क्योंकि यह पहली बार हो रहा है जब सामाजिक विज्ञान, मानविकी, कला, विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक को एक साझा मंच पर लाकर अनुसंधान की नई इबारत लिखी जा रही है। इस दूरदर्शी पहल का सीधा उद्देश्य देश के भीतर सतत विकास और सामाजिक नवाचार की रफ्तार को कई गुना बढ़ाना है, ताकि वैश्विक पटल पर भारत तकनीकी और कूटनीतिक रूप से सबसे आगे खड़ा हो सके।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की आधारशिला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप रखी गई है, जिसमें बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) शिक्षा और शोध को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। एएनआरएफ का यह महाअभियान इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है कि 21वीं सदी की जटिलतम समस्याओं का समाधान केवल बंद प्रयोगशालाओं में नहीं, बल्कि सामाजिक और वैज्ञानिक पद्धतियों के एकीकृत उपयोग से ही संभव है। इस कड़े मुकाबले में देश भर से प्राप्त हुए 945 शोध प्रस्तावों में से गहन छंटनी के बाद केवल 10 विशिष्ट केंद्रों को इस कमान के लिए चुना गया है, जो इस कार्यक्रम के असाधारण राष्ट्रीय महत्व और इसकी विश्वसनीयता को प्रमाणित करता है। इन चयनित केंद्रों की रीढ़ को मजबूत करने के लिए 20 सहयोगी संस्थानों का एक विशाल नेटवर्क भी तैयार किया गया है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय और चुनिंदा निजी अनुसंधान संस्थान कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।

इन 10 उत्कृष्टता केंद्रों का चयन बेहद रणनीतिक और भविष्योन्मुखी विषयगत क्षेत्रों के आधार पर किया गया है। कूटनीतिक और ऐतिहासिक शोध के मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर को मानव-climatic अंतःक्रिया और पर्यावरण इतिहास केंद्र विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान को पुरातत्व और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण पर शोध केंद्र के रूप में स्थापित किया जा रहा है। सबसे दिलचस्प और आधुनिक तकनीकी एकीकरण का उदाहरण आईआईटी मद्रास में देखने को मिलेगा, जहां संस्कृत भाषा पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संगीत एवं योग केंद्र की स्थापना की जा रही है। इसके अतिरिक्त, देश के भौगोलिक और सांस्कृतिक समावेशन को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) अगरतला में पूर्वोत्तर भारत की लोककथाओं और पारंपरिक ज्ञान के डिजिटलीकरण पर एक विशेष केंद्र की शुरुआत की जा रही है, जो इस क्षेत्र की अनमोल धरोहर को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा।

बदलते दौर में रोजगार की चुनौतियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने के लिए भी इस मास्टरप्लान में पुख्ता व्यवस्था की गई है। मानव विकास संस्थान दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और श्रम बाजार पर विशेष अध्ययन केंद्र बनाया गया है, जो इस बात का वैज्ञानिक खाका तैयार करेगा कि भविष्य की तकनीक से भारतीय नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा। वहीं, आईआईटी धारवाड़ में ग्रामीण विकास एवं स्थिरता केंद्र तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) जम्मू में स्थानीय कारीगरों के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए विशेष केंद्र स्थापित किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर में भाषा प्रदर्शन एवं हस्तक्षेप अनुसंधान केंद्र भाषा और संवाद की बाधाओं को दूर करने की दिशा में काम करेगा। इसके साथ ही, चाणक्य विश्वविद्यालय और पीएसजीआर कृष्णम्मल महिला महाविद्यालय जैसे अग्रणी संस्थानों को डिजिटल मानविकी और कम्प्यूटेशनल अर्थशास्त्र जैसी उभरती तकनीकों पर काम करने का जिम्मा सौंपा गया है, जो पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक एआई या बिग डेटा के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगे।

इस महापरियोजना का दूरगामी प्रभाव भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। ग्रामीण आजीविका में सुधार, कौशल विकास, सामाजिक समावेशन और प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक कंप्यूटिंग से जोड़कर एएनआरएफ एक ऐसा तंत्र विकसित कर रहा है जो सीधे तौर पर देश के नीति-निर्माण को प्रभावित करेगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा माइनिंग के इस युग में सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई यह स्वदेशी प्रणाली भारत को वैश्विक स्तर पर ज्ञान आधारित महाशक्ति (नॉलेज सुपरपावर) के रूप में स्थापित करने का माध्यम बनेगी। यह पहल महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत 2047 के उस स्वर्ण युग का ब्लूप्रिंट है जहां विकास की नई धारा देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को सशक्त बनाते हुए गुजरेगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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