टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एयर इंडिया करीब 10,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने की तैयारी में जुटी हुई है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बैंकों ने एयर इंडिया से कई तरह के सवाल पूछे हैं और उसका पूरा हिसाब-किताब मांगा है। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले से जुड़ी असली और प्रमाणित डिटेल क्या हैं।

एयर इंडिया का नया कर्ज और बैंकों की चिंताएं

एयर इंडिया अपने विमान बेड़े के विस्तार, मौजूदा विमानों के रिफर्बिशमेंट और रोजमर्रा के ऑपरेशनल खर्चों के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने की योजना बना रही है।

हालांकि, बढ़ते घाटे और कैशफ्लो को लेकर कुछ बैंक काफी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कर्जदाता एयर इंडिया के बोर्ड और टाटा संस के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता चाहते हैं, क्योंकि एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन होने के साथ-साथ एयर इंडिया के बोर्ड के भी चेयरमैन हैं।

कैशफ्लो और टर्नअराउंड प्लान पर सवाल

कुछ निजी क्षेत्र के बैंक एयर इंडिया की कैशफ्लो स्थिति और उसके टर्नअराउंड प्लान को लेकर अधिक स्पष्टता चाहते हैं।

इसके विपरीत, सरकारी बैंक मौजूदा क्रेडिट लाइन को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह टाटा ग्रुप के साथ उनका मजबूत संबंध और एयर इंडिया की अच्छी क्रेडिट रेटिंग है।

एयर इंडिया को AAA क्रेडिट रेटिंग हासिल है, जिसे वित्तीय लिहाज से सबसे कम जोखिम वाली रेटिंग माना जाता है। इसके बावजूद लगातार हो रहे घाटे की वजह से कुछ बैंक सतर्क हैं।

टाटा ग्रुप का पक्ष और निवेश

इस पूरे मामले पर टाटा ग्रुप ने आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

ग्रुप के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एविएशन जैसे नए कारोबार को मुनाफे में आने में वक्त लगता है और एयरलाइन की यह स्थिति कोई असामान्य बात नहीं है।

उनके अनुसार, लोन की ब्याज दरों को लेकर बातचीत लगातार जारी है और एयर इंडिया को एक प्रमुख बैंक से पहले ही पर्याप्त कर्ज मिल चुका है।

राहत की बात यह है कि टाटा संस एयरलाइन में अपनी कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दे चुका है। वर्तमान में टाटा संस के पास एयर इंडिया की 74.9% हिस्सेदारी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास बाकी 25.1% हिस्सेदारी है।

इसी साल जून में टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी डालने की मंजूरी दी थी। साल 2021 में एयरलाइन के अधिग्रहण के वक्त 18,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के बाद से टाटा ग्रुप का यह एयर इंडिया में सबसे बड़ा निवेश है।

एक साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ा घाटा

वित्तीय मोर्चे पर एयर इंडिया को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। एयर इंडिया का कंसोलिडेटेड घाटा वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

इससे पिछले वित्त वर्ष यानी FY25 में यह घाटा 10,858 करोड़ रुपये था, जिसका मतलब है कि महज एक साल के भीतर घाटा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।

घाटे में इतनी भारी बढ़ोतरी होने की एक बड़ी वजह विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) से जुड़ा नुकसान भी रहा है।

वित्त वर्ष 2026 में एयरलाइन का फॉरेन एक्सचेंज लॉस बढ़कर 7,388 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह नुकसान 1,545 करोड़ रुपये था।

एयर इंडिया पर पहले से कितना कर्ज है?

मौजूदा समय में एयर इंडिया पर विभिन्न कर्ज सुविधाओं का कुल बकाया करीब 40,000 करोड़ रुपये है।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल द्वारा मई के अंत में किए गए खुलासे के अनुसार, एयर इंडिया का सबसे बड़ा कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) है।

एसबीआई के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक का स्थान आता है, जिनका एयर इंडिया पर कर्ज में बड़ा योगदान है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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