अडानी का 'फ्लाइंग' मास्टरस्ट्रोक! भारत में बनेंगे स्वदेशी विमान; ब्राजील की कंपनी से मिलाया हाथ
अडानी समूह और ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर ने भारत में क्षेत्रीय विमान बनाने के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत भारत में एक 'फाइनल असेंबली लाइन' स्थापित की जाएगी, जहाँ 150 सीटों तक के कमर्शियल विमान बनेंगे। 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली इस महा-डील की पूरी रिपोर्ट, तकनीकी बारीकियों और भविष्य के लक्ष्यों के साथ।

Aircraft Manufacturing : भारतीय विमानन क्षेत्र के इतिहास में मंगलवार का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र के दिग्गज 'अडानी समूह' और ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी 'एम्ब्रेयर' (Embraer) ने एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस महा-गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भारत में एक क्षेत्रीय विमान विनिर्माण इकाई (Manufacturing Unit) स्थापित करना है, जो न केवल 'मेक इन इंडिया' के सपने को पंख देगा, बल्कि भारत को वैश्विक विमानन मानचित्र पर एक विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करेगा।
विमान निर्माण की 'फाइनल असेंबली लाइन' का आगाज़ :
नागर विमानन मंत्रालय में आयोजित एक औपचारिक समारोह में 'अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस' और 'एम्ब्रेयर' के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग की सबसे बड़ी विशेषता भारत में एक 'फाइनल असेंबली लाइन' (FAL) की स्थापना है, जहाँ क्षेत्रीय परिवहन विमानों का निर्माण और असेंबली की जाएगी।
जीत अडानी का विजन: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के निदेशक जीत अडानी ने पुष्टि की कि आगामी कुछ महीनों में विनिर्माण संयंत्र के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन कर लिया जाएगा।
150 सीटों तक के विमान: एम्ब्रेयर विशेष रूप से 150 सीटों तक के कमर्शियल विमानों के निर्माण के लिए विख्यात है, जो भारत के छोटे और मझोले शहरों (Tier-2 & Tier-3) के बीच हवाई संपर्क सुधारने में गेम-चेंजर साबित होंगे।
भविष्य की मांग: एक अनुमान के अनुसार, अगले 20 वर्षों में भारतीय बाजार को 80 से 146 सीटों वाले कम से कम 500 विमानों की आवश्यकता होगी।
आत्मनिर्भरता की दिशा में 'टेक-ऑफ' :
नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। अधिकारियों का मानना है कि केवल आयात पर निर्भर रहकर एक मजबूत विमानन पारिस्थितिकी तंत्र नहीं बनाया जा सकता।
तकनीक का हस्तांतरण: यह समझौता केवल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, कौशल विकास और एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण शामिल है।
रक्षा क्षेत्र को मजबूती: रक्षा सचिव के अनुसार, स्थानीय स्तर पर विमान निर्माण और रखरखाव (MRO) से सैन्य बलों की परिचालन तत्परता बढ़ेगी और कलपुर्जों के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी।
एम्ब्रेयर का भारत में अनुभव: एम्ब्रेयर के 'ई-जेट' (E-Jets) 2005 से ही भारत में सक्रिय हैं और वर्तमान में भारतीय वायुसेना व स्टार एयर जैसी कंपनियों के बेड़े का हिस्सा हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
