base metals lead commodity market 2026 : वैश्विक कमोडिटी बाजार एक नए मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की जगह बेस मेटल्स, खासकर कॉपर, सुर्खियों में आने को तैयार हैं। मौजूदा रुझानों और मांग–आपूर्ति के समीकरणों को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि वर्ष 2026 वह दौर हो सकता है, जब कॉपर कमोडिटी मार्केट की अगुवाई करता नजर आएगा और निवेशकों को अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न की संभावना दिखेगी।

बाजार के आकलन के अनुसार गोल्ड और सिल्वर में मजबूती बनी रह सकती है, लेकिन कॉपर की स्थिति इन दोनों से कहीं अधिक सशक्त दिखाई दे रही है। इसके पीछे कई अहम वैश्विक कारण उभरकर सामने आ रहे हैं। चीन की औद्योगिक और इनवोल्यूशन नीतियों, कॉपर कंसंट्रेट की सीमित आपूर्ति और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, डेटा सेंटर्स तथा पावर सेक्टर से तेजी से बढ़ती मांग ने इस धातु को मजबूती दी है। यही वजह है कि कॉपर इस समय मांग और सप्लाई के उस दौर से गुजर रहा है, जिसे बाजार विशेषज्ञ ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ के रूप में देख रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतें 13,500 से 14,000 डॉलर प्रति टन के स्तर को परख सकती हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है, जहां एमसीएक्स पर कॉपर के भाव 1,300 से 1,350 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इस परिदृश्य में कॉपर से 20 प्रतिशत से अधिक रिटर्न की उम्मीद की जा रही है, जो इसे आने वाले समय का सबसे आकर्षक कमोडिटी विकल्प बनाता है।

वहीं दूसरी ओर गोल्ड और सिल्वर ने बीते समय में उम्मीद से कहीं अधिक तेज प्रदर्शन किया है। 2026 के लिए तय माने जा रहे कई लक्ष्य एक साल पहले ही हासिल हो चुके हैं। इस तेजी को मौसमी रुझानों से अधिक वैश्विक मैक्रो आर्थिक कारकों से जोड़ा जा रहा है। खासतौर पर जापान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद बॉन्ड मार्केट में बढ़े तनाव ने निवेशकों को गोल्ड की ओर मोड़ दिया। इसके साथ ही गोल्ड-बैक्ड क्रिप्टोकरेंसी से पैदा हुई नई मांग ने भी सोने को सहारा दिया है।

आकलन के मुताबिक गोल्ड को 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास मजबूत समर्थन मिल सकता है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी कीमतें 4,650 से 4,700 डॉलर प्रति औंस तक भी पहुंच सकती हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि 2025 जैसी तीव्र रैली की उम्मीद करना यथार्थवादी नहीं होगा और गोल्ड से 10 से 15 प्रतिशत के संतुलित रिटर्न की संभावना अधिक मानी जा रही है।

सिल्वर की बात करें तो बाजार में फिलहाल सप्लाई-साइड फैक्टर्स और डेटा सेंटर्स व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से आ रही मांग इसका आधार बने हुए हैं। चांदी को 55 डॉलर प्रति औंस के आसपास मजबूत समर्थन मिलता दिख रहा है। जब तक आपूर्ति में अचानक कोई बड़ा उछाल नहीं आता, तब तक बड़ी गिरावट की आशंका कम मानी जा रही है। 55 से 60 डॉलर के दायरे में गिरावट पर खरीदारी करने वालों के लिए 75 से 80 डॉलर प्रति औंस तक के रिटर्न की संभावना जताई जा रही है, जबकि 100 डॉलर से ऊपर के स्तर फिलहाल दूर नजर आते हैं।

कुल मिलाकर संकेत साफ हैं कि 2026 वह साल हो सकता है, जब बेस मेटल्स, विशेषकर कॉपर, कमोडिटी बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके विपरीत सोना और चांदी में तेज उछाल के बजाय स्थिर और संतुलित रिटर्न का दौर देखने को मिल सकता है, जो निवेश रणनीतियों में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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