हरित क्रांति की नई इबारत: बैंक ऑफ बड़ौदा के 'क्लीन एनर्जी समिट 2026' ने दिखाया भविष्य का मार्ग
बैंक ऑफ बड़ौदा ने मुंबई में 'क्लीन एनर्जी समिट 2026' का सफल आयोजन किया, जिसमें डॉ. देबदत्त चांद और श्री ललित त्यागी सहित ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों ने भारत के 2030 के हरित लक्ष्यों और भविष्य की वित्तीय रणनीतियों पर मंथन किया। जानिए कैसे यह सम्मेलन भारत की 'ग्रीन ग्रोथ' और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

23 जनवरी 2026: भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई आज एक ऐसे ऐतिहासिक मंथन की गवाह बनी, जिसने देश के ऊर्जा भविष्य की दिशा और दशा तय कर दी है। 'पावरिंग इंडियाज ग्रीन ग्रोथ' की गूंज के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा आयोजित 'क्लीन एनर्जी समिट 2026' महज एक सम्मेलन नहीं, बल्कि 2030 के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को भेदने का एक रणनीतिक शंखनाद साबित हुआ। भारत के अंतरराष्ट्रीय बैंक ने इस मंच पर देश के ऊर्जा इकोसिस्टम के दिग्गजों को एक साथ लाकर स्थायीत्वपूर्ण ऊर्जा और हरित वित्त के नए युग का सूत्रपात किया है।
इस शिखर सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स, वैश्विक निवेशक, नीति विशेषज्ञ और वित्तीय संस्थानों के 125 से अधिक शीर्ष प्रतिनिधियों ने शिरकत की। यह आयोजन एक ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर वैश्विक पटल पर नेतृत्वकारी भूमिका में है। पूरे दिन चली सघन चर्चाओं का केंद्र बिंदु स्केलेबल, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार स्वच्छ ऊर्जा समाधानों का निर्माण करना रहा।
सम्मेलन का नेतृत्व करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. देबदत्त चांद ने एक बेहद प्रभावशाली विजन साझा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत का स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन इस दशक के सबसे महत्वपूर्ण निवेश अवसरों में से एक है। डॉ. चांद ने इस बात पर जोर दिया कि बैंक ऑफ बड़ौदा जलवायु उत्तरदायित्व के अनुरूप पूंजी प्रवाह को संरेखित कर एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए बताया कि बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने और अभिनव वित्तीय संरचनाओं के लिए डेवलपर्स और वित्तीय संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग अनिवार्य है, ताकि विकास न केवल तेज हो बल्कि वित्तीय रूप से सुदृढ़ भी बना रहे।
इसी सुर में सुर मिलाते हुए बैंक के कार्यपालक निदेशक श्री ललित त्यागी ने नवीकरणीय ऊर्जा को भारत के आर्थिक भविष्य की आधारशिला बताया। उन्होंने 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि अब सौर, वायु और जलविद्युत के साथ-साथ परमाणु, हाइब्रिड और चौबीसों घंटे उपलब्ध (RTC) परियोजनाओं को सशक्त समर्थन देना बैंक की प्राथमिकता है। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैंक ऑफ बड़ौदा भारत की हरित महत्वाकांक्षाओं को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शिखर सम्मेलन की पैनल चर्चाओं ने तकनीकी और वित्तीय बारीकियों की गहराई से पड़ताल की। "स्केलेबल, विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार नवीकरणीय कंपनियों और प्लेटफार्मों का निर्माण" विषय पर आयोजित पहले सत्र में अडानी ग्रीन एनर्जी, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, टाटा पॉवर रेन्यूएबल एनर्जी, क्लीनमैक्स एनवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस और हिंदुजा रेन्यूएबल्स एनर्जी जैसी दिग्गज कंपनियों के नेतृत्वकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इन विशेषज्ञों ने मेगावाट से गीगावाट स्केल तक के सफर, विकसित होते राजस्व मॉडल और ग्रीन हाइड्रोजन व फ्लोटिंग सोलर जैसे उभरते क्षेत्रों पर गंभीर मंथन किया।
वहीं, वित्तपोषण के पहलुओं को सुलझाने के लिए आयोजित "ग्रीन ट्रांज़िशन को फायनांसिंग करना" सत्र में एनएबीएफआईडी (NaBFID), आईआईएफसीएल (IIFCEL), इंडिया इंफ्राडेब्ट, एमयूएफजी (MUFG) और केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। इस चर्चा में केयर रेटिंग्स की सेक्टर आउटलुक प्रस्तुति ने पूंजी आवश्यकताओं और जोखिम प्रबंधन पर महत्वपूर्ण डेटा साझा किया। विशेषज्ञों ने ग्रीन बॉन्ड, ब्लेंडेड फायनांस और दीर्घकालिक ऋण संरचनाओं जैसे अभिनव वित्तीय साधनों पर विस्तार से बात की, जो आने वाले समय में हरित परियोजनाओं की रीढ़ बनेंगे। यह समिट भारत के स्थायी विकास की यात्रा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है, जिसने यह साफ कर दिया है कि हरित विकास अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भारत की प्रगति की नई पहचान है।

Pratahkal Bureau
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