FAO livestock statistics India : भारतीय कृषि परिदृश्य में एक मौन क्रांति ने अब एक विशाल आर्थिक शक्ति का रूप ले लिया है। पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन अब भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ बनकर उभरा है। मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों ने देश के आर्थिक गलियारों में नई ऊर्जा भर दी है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014-15 से अब तक पशुधन क्षेत्र ने 12.77 प्रतिशत की अभूतपूर्व औसत वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। यह विकास दर न केवल कृषि क्षेत्र के अन्य घटकों से कहीं अधिक है, बल्कि इसने करोड़ों किसानों की आय के स्रोतों को स्थायित्व प्रदान करते हुए खेती के जोखिमों को कम करने में भी निर्णायक भूमिका निभाई है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के कुल सकल मूल्यवर्धन (GVA) में पशुधन की हिस्सेदारी में जो उछाल आया है, वह ऐतिहासिक है। जहां 2014-15 में इस क्षेत्र का योगदान महज 24.38 प्रतिशत था, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 30.87 प्रतिशत के प्रभावशाली स्तर पर पहुँच गया है। वर्तमान कीमतों पर कुल सकल बाजार मूल्य (GVAC) में इस क्षेत्र की 5.49 प्रतिशत की हिस्सेदारी यह स्पष्ट करती है कि डेयरी और पशुपालन अब केवल सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि एक मुख्य आर्थिक इंजन बन चुके हैं।

विशेष रूप से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक पटल पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का अकेले 25 प्रतिशत हिस्सा साझा करता है। पिछले ग्यारह वर्षों में देश का दूध उत्पादन 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 247.87 मिलियन टन के चौंकाने वाले स्तर पर पहुँच गया है। भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता अब 485 ग्राम प्रतिदिन है, जो 328 ग्राम के वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। यह उपलब्धि तब और भी बड़ी हो जाती है जब हम देखते हैं कि वैश्विक दुग्ध उत्पादन की गति जहां मात्र 1.12 प्रतिशत है, वहीं भारत 5.41 प्रतिशत की दर से निरंतर आगे बढ़ रहा है।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आंकड़े भी भारत की इस बढ़ती धाक की पुष्टि करते हैं। अंडा उत्पादन के मामले में भारत आज विश्व में दूसरे और मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर काबिज है। देश में अंडे की उपलब्धता जहां 2014-15 में प्रति व्यक्ति 62 थी, वह अब बढ़कर 106 अंडे प्रति वर्ष हो गई है। इसी प्रकार मांस उत्पादन भी 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 10.50 मिलियन टन के पार जा चुका है। पशुधन क्षेत्र की यह चौतरफा प्रगति इस बात का प्रमाण है कि भारत अब पोषण सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर चुका है। यह क्षेत्र न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारतीय पशु उत्पादों की मांग और साख को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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