वित्तीय पत्रकारिता का एक स्वर्णिम अध्याय: सीएनबीसी-आवाज़ के 21 वर्ष और भारतीय बाजार की अविश्वसनीय उड़ान
सीएनबीसी-आवाज़ ने वित्तीय पत्रकारिता के 21 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कैसे इन दो दशकों में सेंसेक्स 6000 से 80,000 तक पहुँचा और मिडकैप शेयरों ने निवेशकों को मालामाल किया। लेख में डीमैट खातों की क्रांति और म्यूचुअल फंड एसआईपी के जरिए आम आदमी के जुड़ाव की पूरी कहानी विस्तार से दी गई है। भारतीय शेयर बाजार के इस ऐतिहासिक सफर और वित्तीय साक्षरता के स्वर्णिम युग का विश्लेषण।

भारतीय टेलीविजन इतिहास और वित्तीय जगत के बीच जब भी किसी गहरे सेतु की चर्चा होगी, तो सीएनबीसी-आवाज़ का नाम सबसे प्रमुखता से उभरेगा। आज यह प्रतिष्ठित संस्थान अपनी स्थापना के 21 गौरवशाली वर्ष पूर्ण कर रहा है। यह मात्र एक चैनल की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि यह भारत के उस आर्थिक परिवर्तन की गाथा है जिसने एक सामान्य नागरिक को दलाल स्ट्रीट की बारीकियों से परिचित कराया। बीते दो दशकों में भारतीय शेयर बाजार ने अर्श से फर्श और फिर रिकॉर्ड ऊंचाइयों तक का जो सफर तय किया है, वह वैश्विक निवेशकों के लिए शोध का विषय बन गया है। इन 21 वर्षों में न केवल सेंसेक्स और निफ्टी के अंकों में उछाल आया, बल्कि देश में निवेश की संस्कृति ने भी एक नया आकार लिया है।
जब इस यात्रा की शुरुआत हुई थी, तब भारतीय शेयर बाजार अपनी किशोरावस्था में था, लेकिन आज यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली बाजारों में से एक बनकर उभरा है। आंकड़ों की गहराई में उतरें तो 2004-05 के दौर में सेंसेक्स महज 6,000 के स्तर के आसपास संघर्ष कर रहा था, जो आज 80,000 के ऐतिहासिक शिखर को छूने की ओर अग्रसर है। इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने निवेशकों की संपत्ति में जो जादुई वृद्धि की है, उसने कई साधारण निवेशकों को करोड़पति बना दिया। सीएनबीसी के इस सफर के दौरान बाजार ने 2008 की वैश्विक मंदी, 2016 की नोटबंदी और 2020 की वैश्विक महामारी जैसे भीषण झटकों को झेला, लेकिन हर बार भारतीय बाजार ने एक नई ऊर्जा के साथ वापसी की। यह सफर गवाह है कि कैसे मिडकैप शेयरों ने मल्टीबैगर रिटर्न देकर भारतीय पोर्टफोलियो की तस्वीर बदल दी।
बाजार की इस चाल के साथ-साथ वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में जो सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आया, वह डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड की लोकप्रियता में देखा गया। दो दशक पहले तक शेयर बाजार में निवेश कुछ चुनिंदा लोगों और बड़े शहरों तक सीमित था। लेकिन बीते 21 वर्षों में डीमैट खातों की संख्या में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि अब भारत का आम आदमी जोखिम लेने और संपत्ति सृजन करने के लिए तैयार है। विशेष रूप से 'म्यूचुअल फंड सही है' जैसे अभियानों और व्यवस्थित निवेश योजना यानी एसआईपी (SIP) के प्रति बढ़ती जागरूकता ने घरेलू निवेशकों को बाजार की रीढ़ बना दिया है। आज विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बीच भी यदि भारतीय बाजार मजबूती से खड़ा रहता है, तो इसका श्रेय उन्हीं करोड़ों खुदरा निवेशकों को जाता है जिन्होंने म्यूचुअल फंड के माध्यम से बाजार पर अपना भरोसा जताया है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर नेटवर्क18 और सीएनबीसी-आवाज़ की पूरी टीम ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस यात्रा को सफल बनाने में चैनल के शीर्ष नेतृत्व और प्रमुख चेहरों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बाजार विशेषज्ञों और एंकर्स ने हर उतार-चढ़ाव में दर्शकों का मार्गदर्शन किया। इस लंबी अवधि में चैनल ने न केवल सटीक खबरें दीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता को घर-घर पहुँचाया। आज जब सीएनबीसी अपने 21वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के उस आत्मविश्वास का प्रतीक है जहाँ निवेश अब केवल बचत नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। यह मील का पत्थर भारतीय वित्तीय पत्रकारिता की परिपक्वता और बाजार के उज्जवल भविष्य की एक सशक्त मुनादी है।

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