नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है जो उनके भविष्य की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदल सकती है। नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) यानी NC-JCM की ड्राफ्ट कमेटी ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपना बहुप्रतीक्षित और अंतिम मेमोरेंडम जमा कर दिया है। इस विस्तृत दस्तावेज में पेश किए गए प्रस्ताव यदि सरकार द्वारा स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो सरकारी सेवा के इतिहास में वेतन और भत्तों के स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्ष 2026 से प्रभावी होने वाले इन सुझावों का प्राथमिक उद्देश्य बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बढ़ाना और उनके सामाजिक सुरक्षा कवच को और अधिक मजबूत करना है।

इस मेमोरेंडम का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय बना केंद्र बिंदु न्यूनतम मूल वेतन (बेसिक पे) में की गई भारी बढ़ोतरी की मांग है। कमेटी ने सरकार से वर्तमान न्यूनतम बेसिक पे को 18,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की गई है। जानकारों का मानना है कि यदि यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो निचले स्तर से लेकर उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों के वेतन और पेंशन में अभूतपूर्व इजाफा होगा। यह न केवल कर्मचारियों के रहन-सहन के स्तर को ऊंचा उठाएगा बल्कि अर्थव्यवस्था में तरलता लाने का भी काम करेगा।

वेतन ढांचे को आधुनिक और सरल बनाने की दिशा में भी मेमोरेंडम में ठोस कदम सुझाए गए हैं। वर्तमान में संचालित 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले 18 अलग-अलग पे-लेवल को समाप्त कर केवल सात बड़े वेतन स्केल बनाने की सिफारिश की गई है। इस सरलीकरण के पीछे तर्क यह है कि इससे करियर में प्रगति की प्रक्रिया सुगम होगी और प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आएगी। प्रस्तावित तालिका दर्शाती है कि इस बदलाव के बाद मिड-लेवल के कर्मचारियों का मूल वेतन उनकी पोस्ट के आधार पर लगभग 1.35 लाख रुपये से शुरू होकर 2.15 लाख रुपये से भी ऊपर जा सकता है। साथ ही, समय के साथ वेतन की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए सालाना 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का प्रावधान भी शामिल किया गया है जो मौजूदा दरों से काफी अधिक है।

कानूनी और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर, सबसे ज्वलंत मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर की गई है। ड्राफ्ट कमेटी ने पुरजोर वकालत की है कि 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन के दायरे में लाया जाए। इसके अतिरिक्त, पेंशन निर्धारण के लिए अंतिम बार प्राप्त वेतन का 67 प्रतिशत हिस्सा तय करने और फैमिली पेंशन को 50 प्रतिशत पर स्थिर करने का प्रस्ताव दिया गया है। कर्मचारियों के करियर विकास को सुनिश्चित करने हेतु 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम पांच प्रमोशन या वित्तीय अपग्रेड का वैधानिक अधिकार देने की बात भी कही गई है।

भत्तों और अन्य सुविधाओं के मामले में भी यह मेमोरेंडम काफी उदार नजर आता है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के ढांचे में सुधार करते हुए न्यूनतम दर को 30 प्रतिशत तक ले जाने और मेट्रो शहरों के लिए विशेष प्रावधान करने की मांग है। सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 240 दिन करने, पैटरनिटी लीव में विस्तार और ड्यूटी के दौरान दुर्घटना की स्थिति में मुआवजे की राशि बढ़ाने जैसे संवेदनशील प्रस्ताव रखे गए हैं।

8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी गई ये मांगें केवल आर्थिक लाभ का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि यह बदलते आर्थिक परिदृश्य में सरकारी तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों की जीवन प्रत्याशा और संतुष्टि का ब्लूप्रिंट है। हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के वित्तीय संसाधनों और राजकोषीय विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन मेमोरेंडम के जमा होने मात्र से ही कर्मचारियों के भीतर एक नई उम्मीद का संचार हुआ है। यदि 1 जनवरी 2026 से इन सुझावों पर मुहर लगती है, तो यह भारतीय सार्वजनिक सेवा क्षेत्र के लिए एक नया स्वर्ण युग साबित हो सकता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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