8वें वेतन आयोग के गठन का इंतजार कर रहे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नई सूचनाएं चिंता का विषय बन सकती हैं। शुरुआती संकेत मिल रहे हैं कि सरकार और वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के आसपास ही रखने पर विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग के दौरान भी फिटमेंट फैक्टर 2.57 ही था। यदि भविष्य में इसी दर को बरकरार रखा जाता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में कोई विशेष वृद्धि होने की संभावना नहीं है। सरकार इस पूरी कवायद को लेकर बेहद सतर्क है और राज्य सरकारों के साथ भी परामर्श जारी है।

वित्तीय जानकारों और सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ का आकलन सरकार की प्राथमिकता में है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी का कहना है कि वर्तमान में आयोग फिटमेंट फैक्टर की संभावित सीमा, राज्य सरकारों के फीडबैक और संशोधित वेतन-पेंशन संरचनाओं के वित्तीय प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। केंद्र और राज्यों के खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव के कारण सरकार बहुत सावधानी से कदम उठा रही है। फिटमेंट फैक्टर वेतन और पेंशन की गणना का मुख्य आधार होता है, जो यह तय करता है कि वास्तविक वृद्धि कितनी होगी।

दूसरी तरफ, कर्मचारी यूनियनों ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की जोरदार मांग की है। यूनियनों का तर्क है कि यदि इस मांग को स्वीकार किया जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 69,000 रुपये प्रति माह हो जाएगा। लेकिन अगर सरकार 2.57 के पुराने फॉर्मूले पर ही टिकी रहती है, तो कर्मचारियों का 69,000 रुपये न्यूनतम बेसिक सैलरी का सपना पूरा होता नजर नहीं आता। कर्मचारी संगठन लगातार अपने ज्ञापन सरकार को सौंप रहे हैं, जिसके आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

आयोग की परामर्श प्रक्रिया देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक स्तर पर जारी है। दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बैठकों का आयोजन हो चुका है। अब अगला दौर उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के साथ शुरू होने वाला है। सभी राज्यों से फीडबैक और सुझाव मिलने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इन सिफारिशों के आधार पर ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नई वेतन संरचना लागू की जाएगी।

7वें वेतन आयोग के अनुभव पर नजर डालें तो उस समय फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था, जिससे न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये से बढ़कर 17,990 रुपये हो गया था। उस निर्णय का प्रभाव यह हुआ कि वित्त वर्ष 2016-17 में केंद्र सरकार का राजस्व व्यय 4.8 प्रतिशत से बढ़कर 9.9 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसी वित्तीय डेटा को ध्यान में रखते हुए 8वें वेतन आयोग द्वारा अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है, ताकि सरकार के राजस्व पर बहुत अधिक भार न पड़े। आने वाले समय में अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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