पीएम मोदी की अपील के बीच राहत की खबर; देश में पर्याप्त है पेट्रोल-डीजल का स्टॉक
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद सरकार का बड़ा बयान: भारत के पास 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार सुरक्षित है। तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान के बीच जानें ताजा अपडेट।

भारत के एक व्यस्त पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाते नागरिक, जहां सरकार ने वैश्विक संकट के बावजूद पर्याप्त तेल आपूर्ति और भंडार का आश्वासन दिया है।
India fuel reserve status 2026 : वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उपजी चिंताओं पर केंद्र सरकार ने सोमवार को एक विस्तृत और आश्वस्त करने वाला आधिकारिक बयान जारी किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को देशवासियों से ईंधन बचाने और 'आर्थिक देशभक्ति' दिखाने की भावुक अपील के ठीक एक दिन बाद, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी या कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IGoM) की उच्च स्तरीय ब्रीफिंग के दौरान सरकारी अधिकारियों ने देश को भरोसा दिलाया कि भारत के पास किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और वैश्विक संकट के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जहां दुनिया के कई विकसित देशों ने घरेलू खपत को कम करने के लिए कड़े आपातकालीन उपाय लागू कर दिए हैं, वहीं भारत एक सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में बना हुआ है। सरकार ने खुलासा किया कि वर्तमान में भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है। इसके अतिरिक्त, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के ऐतिहासिक और मजबूत स्तर पर है, जो किसी भी वित्तीय झटके को सहने में सक्षम है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर होने के नाते भारत न केवल अपनी घरेलू मांग को पूरी तरह पूरा कर रहा है, बल्कि 150 से अधिक देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी जारी रखे हुए है।
हालांकि, इस सुरक्षा कवच को बनाए रखने के लिए देश को भारी वित्तीय कीमत चुकानी पड़ रही है। सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों का बोझ आम नागरिकों पर न पड़े, इसके लिए तेल विपणन कंपनियां रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान सह रही हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी यानी लागत और बिक्री के बीच का अंतर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सामूहिक भागीदारी और ईंधन के समझदारी भरे उपयोग की अपील की है, ताकि देश पर पड़ने वाले इस अभूतपूर्व वित्तीय बोझ को कम किया जा सके और भविष्य की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
रक्षा मंत्रालय और संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से नागरिकों से पैनिक न करने और रिटेल आउटलेट्स पर भीड़ न लगाने का आग्रह किया है। सरकार का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत उन चुनिंदा राष्ट्रों में शामिल है, जहां युद्ध शुरू होने के 70 दिनों बाद भी पेट्रोलियम की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अंततः, यह आधिकारिक स्पष्टीकरण न केवल बाजार में व्याप्त अनिश्चितता को समाप्त करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकार अपनी रणनीतिक भंडार क्षमता और कूटनीतिक कौशल के जरिए वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रही है। देशवासियों के लिए संदेश साफ है कि संयम और बचत ही इस आर्थिक युद्ध में भारत का सबसे बड़ा रक्षा कवच साबित होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
