मुंबई बीएमसी चुनाव में जीत हासिल करने के बाद भी 79 नगरसेवकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए जाति प्रमाण पत्र, संपत्ति का ब्यौरा, आपराधिक जानकारी और हलफनामे में कमियों को लेकर कुल 79 नगरसेवकों के चुनाव को अदालत में चुनौती दी गई है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा मांगी गई जानकारी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

पूर्व महापौर विशाखा राउत का नगरसेवक पद रद्द होने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत में दायर कुल 79 याचिकाओं में से अब तक 5 नगरसेवकों का चुनाव रद्द कर दिया गया है।

रद्द किए गए चुनाव में शिवसेना उद्धव गुट और एमआईएम के 2-2 तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार गुट के 1 नगरसेवक शामिल हैं। अदालत की कार्रवाई से बीएमसी में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के पार्षद कानूनी पचड़े में फंस गए हैं।

यह घटनाक्रम बताता है कि चुनाव में केवल जनता का वोट हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उम्मीदवारी फॉर्म के साथ दी गई हर जानकारी का सच होना भी उतना ही जरूरी है। नामांकन के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों और हलफनामे में किसी भी कमी को लेकर चुनाव को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

अब राजनीतिक गलियारों की नजरें बाकी बची याचिकाओं पर आने वाले अदालती फैसलों पर टिकी हैं। अगर कुछ और नगरसेवकों की कुर्सी खतरे में पड़ती है, तो बीएमसी के अंदर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। इस पूरी स्थिति ने सभी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।

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