पटना के गांधी मैदान में शुक्रवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भव्य आयोजन, सख्त सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इस समारोह को खास बना दिया। बिहार विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद एनडीए ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर भरोसा किया, और उन्होंने भारी बहुमत के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपना नया कार्यकाल शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई प्रमुख नेता इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

लेकिन शपथ ग्रहण के साथ ही एक और मुद्दा सुर्खियों में लौट आया—देश में किस मुख्यमंत्री को सबसे खतरनाक सुरक्षा कवर मिला हुआ है, और इस सूची में नीतीश कुमार किस पायदान पर आते हैं। बढ़ते खतरे, राजनीतिक संवेदनशीलता और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों के आधार पर तैयार होने वाली इस रैंकिंग पर देश भर की नजरें टिकी रहती हैं।

ईंट से ईंट बजा देने वाले अपने निर्णयों और प्रखर छवि के लिए जाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सुरक्षा सूची में सबसे शीर्ष पर हैं। उन्हें जेड प्लस कैटेगरी का सुरक्षा कवर प्राप्त है, जो देश के सबसे सख्त वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल में से एक माना जाता है। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सीआरपीएफ की स्पेशल सिक्योरिटी विंग के पास है, जबकि कार्यक्रमों में ASL यानी एडवांस्ड सिक्योरिटी लेवल की जांच प्रधानमंत्री स्तर की सुरक्षा के समान मानी जाती है। वर्ष 2024 के बाद एनएसजी को वीआईपी सुरक्षा से हटाए जाने के बाद यह जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी गई थी।

योगी आदित्यनाथ के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी देश के सबसे कड़े सुरक्षा घेरे में शामिल हैं। पहले उन्हें केवल पूर्वोत्तर क्षेत्र में जेड सुरक्षा मिलती थी, लेकिन हालिया आकलनों के आधार पर उन्हें पूरे देश में जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गई है। इसके साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हालिया हमले के बाद उनकी सुरक्षा को भी और मजबूत किया गया है। उन्हें भी जेड प्लस सुरक्षा में शामिल किया गया है, जबकि दिल्ली पुलिस ने उनके लिए दो-स्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया है।

इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी किसी से कम नहीं हैं। राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील राज्य का नेतृत्व करते हुए उनका सुरक्षा कवच देश के सबसे सख्त कवर में से एक माना जाता है। उन्हें भी जेड प्लस कैटेगरी की सुरक्षा प्राप्त है। इसके साथ ही उन्हें बिहार विशेष सुरक्षा बल अधिनियम 2000 के तहत अतिरिक्त सुरक्षा मिली हुई है। उनकी सुरक्षा में लगभग 200 प्रशिक्षित कमांडो तैनात रहते हैं।

नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था तीन स्तरों में बंटी है। सबसे करीब की सुरक्षा परिधि में एसएसजी कमांडो रहते हैं, जिनमें आईटीबीपी, सीआरपीएफ, एनएसजी और एसपीजी जैसी विशेष बलों के प्रशिक्षित जवान शामिल होते हैं। इसके बाहर मीडियम लेयर में स्पेशल ब्रांच के अधिकारी और अंतिम सुरक्षा घेरा स्थानीय पुलिस संभालती है।

बढ़ते खतरे, बदलती राजनीति और तकनीकी चुनौतियों के इस दौर में भारत के मुख्यमंत्रियों का सुरक्षा कवच न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि लोकतंत्र की स्थिरता का भी प्रतिबिंब है। देश की राजनीति में बड़ा कद और बड़ा खतरा साथ-साथ चलते हैं—और इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था लगातार और मजबूत होती जा रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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