बिहार में बारिश से बाढ़ जैसे हालात: पश्चिम चंपारण के 22 गांवों का संपर्क टूटा, जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे ग्रामीण
बिहार के पश्चिम चंपारण में लगातार बारिश और गंडक बराज से पानी छोड़े जाने के बाद दोन क्षेत्र के 22 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं, जबकि मरीज, विद्यार्थी और किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

तस्वीर में कुछ लोग पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र में उफनती नदी को पैदल पार करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
बिहार के पश्चिम चंपारण में नेपाल और पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए बड़ी आफत बन गई है। गंडक बराज से लगभग 1 लाख 88 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया है और दोपहर 12 बजे तक डाउन स्ट्रीम में पानी छोड़ा गया। इसके चलते जिले के दुर्गम दोन क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।
भापसा, मनोर, हरहा, कौशील सहित कई पहाड़ी नदियों में उफान आने और जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क के तेज बहाव में बह जाने से 22 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। सड़क संपर्क बाधित होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करनी पड़ रही है।
लगातार बारिश के कारण पश्चिम चंपारण का दोन क्षेत्र बाढ़ जैसे हालात से जूझ रहा है। पहाड़ी नदियां उफान पर हैं और जिला मुख्यालय तक पहुंचने का मुख्य मार्ग बह जाने से प्रभावित गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं। जरूरी सामान लाना, अस्पताल जाना या बच्चों को स्कूल भेजना, हर काम के लिए लोगों को उफनती नदी पार करनी पड़ रही है। ऐसी स्थिति में एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन मजबूरी लोगों को हर दिन मौत से मुकाबला करने पर विवश कर रही है।
सड़क संपर्क टूटने का सबसे अधिक असर मरीजों, विद्यार्थियों और किसानों पर पड़ा है। बीमार लोगों को पप अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि किसान और व्यापारी अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। उनका कहना है, "हर साल बरसात में यही हाल होता है। सड़क बह जाती है, गांव कट जाते हैं। मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। सरकार स्थायी पुल और सड़क बनाए।"
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने और स्थायी पुल निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान ऐसे ही हालात बनते हैं, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
लगातार बारिश ने पश्चिम चंपारण के दोन क्षेत्र के 22 गांवों की जिंदगी थाम दी है। जब तक सड़क और पुल की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक हर मानसून यहां के लोगों के लिए मुसीबत और जान का जोखिम बनकर आता रहेगा।

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