SC में गरमाई बहस; चुनाव आयोग (EC) ने NGO पर साधा निशाना
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान EC ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी दलीलें और दस्तावेज़ सीधे कोर्ट को नहीं दे सकते। आयोग ने आग्रह किया कि वे हलफनामा दायर करें, जिसके बाद ही उस पर औपचारिक जवाब दिया जाएगा।

7 अक्टूबर , मंगलवार को SIR लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दी। इस दौरान चुनाव आयोग (EC) ने कहा की इलेक्शन कमीशन के पास SIR लिस्ट को लेकर बिहार के किसी भी व्यक्ति की तक्रार नहीं आई है। सिर्फ दिल्ली में बैठे NGO ही ज्यादा शोर मचा रहे है। तो आईये जानते है क्या है ये मामला।
बिहार के नए SIR लिस्ट को लेकर सियासी घमासान चालू है। इस लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चालू थी। इस दौरान EC का बयान सामने आया है। इस मामले में याचिका कर्ताओंके ओर से सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण और अभिषेक मनु सिंघवी इन दोनों ने मिलकर याचिका कर्ताओं की दलीले SC के सामने रखी। जिसमे उन्होंने EC पर आरोप किये है। उनका आरोप है की फायनल लिस्ट से करिब करीब 3.66 लाख लोगों के नाम गायब कराए गए थे। साथ ही जिनके नाम लिस्ट से गायब है उनको इस बात की खबर तक नहीं दी गई , ताकि वे इसके खिलाफ आवाज उठा सके। इस युक्तिवाद पर EC के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा की यह लिस्ट सभी राजनितिक दलों को सौपी थी। लेकिन कोई व्यक्ति स्वयं आयोग के पास नहीं आया। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में बैठे कुछ एनजीओ शोर मचा रहे हैं, जबकि उन्होंने अब तक फाइनल लिस्ट को चुनौती देने के लिए कोई आवेदन नहीं दायर किया। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि याचिका सिर्फ पुरानी दलीलों पर आधारित है।
बेंच के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने याचिकाकर्ता के एडवोकेट प्रशांत भूषण से पूछा कि असल में पीड़ित लोग कहां हैं? उनमे से किसीने अबतक कोई इसके खिलाफ कोई आवेदन क्यों नहीं दिया ? इस युक्तिवाद पर एडवोकेट भूषण ने कहा कि वह 100-200 लोगों के नाम दे सकते हैं, जिनका नाम लिस्ट में शामिल नहीं है। साथ हीउन्होंने दावा किया कि काफी संख्या में लोग लिस्ट से बाहर किए गए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि इन नामों को सार्वजनिक किया जाए।
चुनाव आयोग ने इस दलील पर स्पष्ट किया कि दस्तावेज और दलीलें सीधे बेंच को नहीं दी जा सकतीं। आयोग ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना होगा, जिस पर आयोग जवाब देगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हलफनामे (Affidavit) में सिर्फ खास मामलों को शामिल किया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग की वेबसाइट पर ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट दोनों मौजूद हैं, जिससे लोग यह देख सकते हैं कि किन नामों को लिस्ट से बाहर किया गया।
इसके बाद प्रशांत भूषण ने कोर्ट को कहा की, सबसे पहले वाली ड्राफ्ट लिस्ट में से ६५ लाख लोगों को हटाया गया था। लेकिन जब SC ने इसपर करवाई की तब २१ लाख लोगों को लिस्ट में फिर से जोड़ दिया दिया है। इसके साथ उन्होंने बताया की लिस्ट में जो नाम अब जोड़े गए है वो नाम पहली लिस्ट से हटाए हुए है या फिर वे नए नाम है ? इसपर SC ने EC को जो नाम लिस्ट से हटाए गए हैं, उनका डेटा डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिस में दिया जाए ऐसा आदेश दिया था। जिसके बाद EC ने बताया की इसमें अब जो नाम जुड़े है उनमे से ज्यादातर नाम बिलकुल नए है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
