बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की करारी हार के ठीक एक दिन बाद लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी रोहिणी आचार्य ने ऐसा ऐलान कर दिया जिसने पूरे राजनीतिक गलियारे को हिला कर रख दिया। पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से मुखातिब रोहिणी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका अब कोई परिवार नहीं है और उन्होंने परिवार के साथ-साथ राजनीति से भी दूरी बना ली है। उनके इस बयान ने न केवल यादव परिवार के आंतरिक कलह को उजागर किया बल्कि पार्टी के भीतर की गुटबाजी को भी सामने ला दिया।

रोहिणी आचार्य ने सीधे तौर पर अपने भाई तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज पर परिवार से निकाले जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मेरा कोई परिवार नहीं है। आपको तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज से जाकर पूछना चाहिए। इन्होंने ही मुझे परिवार से निकाला है।” रोहिणी ने आगे दावा किया कि इन लोगों का नाम लेने मात्र से घर में गालियां दी जाती हैं, बेइज्जती की जाती है और चप्पल उठाकर मारने की धमकी मिलती है। उन्होंने कहा कि ये लोग कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते और पार्टी की हार के लिए किसी को जवाबदेह नहीं ठहराना चाहते।

घटना की शुरुआत शनिवार (15 नवंबर) को तब हुई जब रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।” यह पोस्ट वायरल होने के बाद पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गई। इसके अगले ही दिन पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी ने मीडिया के सामने विस्तार से अपनी पीड़ा बयां की।

रोहिणी ने पार्टी की हार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरा देश जानना चाहता है कि आरजेडी इतनी बुरी तरह क्यों हारी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो चाणक्य बनेगा, उसी से सवाल पूछिए। जब कार्यकर्ता चाणक्य से सवाल कर रहा है, पूरा देश-दुनिया पूछ रहा है कि पार्टी का ऐसा हाल क्यों हुआ, तब संजय यादव और रमीज का नाम लेने पर घर से निकाल दिया जाता है।” उनके इस बयान से साफ है कि पार्टी के भीतर कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।

हालांकि इस मामले में अभी तक तेजस्वी यादव, संजय यादव या रमीज की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आरजेडी के प्रवक्ताओं ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है। कानूनी तौर पर रोहिणी ने किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन उनके आरोपों ने परिवार और पार्टी दोनों में गहरी दरार की ओर इशारा कर दिया है।

बिहार की राजनीति में यादव परिवार हमेशा से एकजुटता का प्रतीक रहा है, लेकिन रोहिणी आचार्य का यह कदम उस छवि पर गहरा आघात है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर खुलकर सामने आया यह कलह भविष्य में आरजेडी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। क्या यह परिवार और पार्टी का अंतिम विभाजन है या सिर्फ एक भावनात्मक प्रतिक्रिया, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि रोहिणी आचार्य का यह बयान बिहार की सियासत के इतिहास में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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