नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सोमवार को पुलिसकर्मियों के अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन ने पुलिस विभाग में बढ़ते असंतोष को खुलकर सामने ला दिया। पूर्वी दिल्ली में तैनात एक एसीपी और एक इंस्पेक्टर को कथित तौर पर वकीलों के दबाव में गैर-कार्यात्मक इकाइयों में स्थानांतरित किए जाने के विरोध में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मुख्यालय पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनुचित बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की और पुलिस एकता के समर्थन में आवाज उठाई। इस घटनाक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए भी असहज स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था सीधे उनके मंत्रालय के अधीन आती है।

दिल्ली पुलिस और नागरिक समाज, युवाओं तथा वकीलों के बीच टकराव की स्थिति जून में शुरू हुए जनविरोध प्रदर्शनों के बाद से लगातार बढ़ती रही है। आरोप है कि केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी में आंदोलनों और प्रदर्शनों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस को सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देशों के परिणामस्वरूप पुलिस की कथित बर्बरता के कई मामले सामने आए। इनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी शामिल हैं।

प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों ने दोनों अधिकारियों के कथित दंडात्मक तबादलों को अनुचित बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पुलिस बल का मनोबल प्रभावित होगा। शीर्ष सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि दोनों अधिकारियों के तबादले का आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से दिल्ली पुलिस आयुक्त को दी गई सलाह के बाद आया था।

वर्दीधारी पुलिस बल के सदस्यों द्वारा इस तरह खुले तौर पर विरोध प्रदर्शन करना गंभीर अनुशासनात्मक अवज्ञा माना जा रहा है। इसे सरकार के प्रति असम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट लिखे जाने तक वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को शांत करने और स्थिति संभालने के प्रयासों में जुटे हुए थे।

दोपहर बीतने के साथ तनाव बढ़ता गया। नाराज पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के भीतर धरना शुरू कर दिया और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी पुलिस एकता के समर्थन में लगातार नारे लगाते रहे, जबकि वरिष्ठ अधिकारी स्थिति को संभालने में असहाय नजर आए। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला है, जब पुलिसकर्मी मुख्यालय के भीतर दाखिल होकर उसके परिसर में इस तरह खुले तौर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

स्थिति गंभीर होने के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और सभी विशेष पुलिस आयुक्तों को प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों की शिकायतें सुनने के लिए बैठक बुलानी पड़ी। इसे पुलिस बल के इतिहास की अभूतपूर्व घटना बताया जा रहा है।

पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त ने पुलिसकर्मियों के साथ की बैठक

यह बैठक पुलिस मुख्यालय स्थित आदर्श ऑडिटोरियम में आयोजित की गई, जो कुछ ही देर में पूरी तरह भर गया। विभिन्न जिलों से पुलिसकर्मी लगातार वहां पहुंचते रहे। इनमें कई पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे। उन्होंने बैठक के दौरान खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

मीडिया कर्मियों को पुलिस मुख्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और कई विशेष पुलिस आयुक्त मंच पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से बातचीत करने की कोशिश की। विभिन्न जिलों से पुलिसकर्मियों का मुख्यालय पहुंचना जारी रहा। वरिष्ठ अधिकारी इस बात को लेकर असमंजस में दिखाई दिए कि स्थिति को कैसे नियंत्रित किया जाए।

प्रदर्शनकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की संभावना के बावजूद वे अधिकारियों के निर्देशों को मानने के लिए तैयार नहीं दिखे। बैठक में पुलिसकर्मियों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी और वकीलों के कथित व्यवहार तथा अपने साथियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताई।

दिन चढ़ने के साथ प्रदर्शन ने और व्यापक रूप ले लिया। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी इस आंदोलन में शामिल हो गईं। यह विरोध प्रदर्शन तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई हिंसा के बाद सामने आया है। इसे दूसरी ऐसी घटना बताया जा रहा है, जब दिल्ली पुलिस के जवानों ने अपने अधिकारों और सम्मान के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। हालांकि, इस बार प्रदर्शन सीधे पुलिस मुख्यालय के भीतर हुआ।

प्रदर्शन जारी रहने के दौरान पुलिस मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की और अपने साथियों के खिलाफ कथित एकतरफा कार्रवाई रोकने की अपील की। पुलिस विभाग के भीतर इस अभूतपूर्व प्रदर्शन से काफी बेचैनी का माहौल पैदा हो गया।

एसीपी मानसवी वशिष्ठ ने रखीं कई मांगें

बैठक के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से यह शामिल था कि वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस न लिया जाए और मामले में बार काउंसिल के एक सदस्य का नाम भी न हटाया जाए। उन्होंने यह मांग भी रखी कि सोमवार के प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए।

बताया जाता है कि एसीपी मानसवी वशिष्ठ ने यहां तक कहा कि यदि विभाग प्रदर्शन के सिलसिले में कोई कार्रवाई करना चाहता है, चाहे वह निलंबन हो या कोई अन्य कठोर कदम, तो वह कार्रवाई केवल उनके खिलाफ की जाए।

हालांकि, बातचीत का पहला दौर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। इसके बाद नाराज पुलिसकर्मी ऑडिटोरियम से बाहर निकल गए। कुछ ही देर बाद बातचीत का दूसरा दौर शुरू होने की संभावना की खबरें सामने आईं।

दिल्ली पुलिस को देश के अनुशासित पुलिस बलों में गिना जाता है। लेकिन इस पूरे मामले को लेकर पुलिसकर्मियों में नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि वे पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के निर्देशों को भी मानने के लिए तैयार नहीं दिखाई दिए। पुलिस मुख्यालय के भीतर हुए इस विरोध प्रदर्शन ने विभागीय अनुशासन, अधिकारियों के तबादलों और पुलिसकर्मियों की शिकायतों के निपटारे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Om Prakash Pal

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नाम: ओम प्रकाश पाल

वर्तमान पद: स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार

कार्यक्षेत्र: नेशनल ब्यूरो (राष्ट्रीय स्तर)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, संसद, केंद्रीय मंत्रालय, कृषि, साहित्य, खेल एवं प्रशासन (बिजनेस को छोड़कर सभी विषयों पर कार्य)

पत्रकारिता अनुभव: लगभग 39 वर्ष

परिचय एवं अनुभव 

ओम प्रकाश पाल पिछले 39 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ब्यूरो में विशेष संवाददाता के रूप में लगभग 20 वर्षों तक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की रिपोर्टिंग की है।

एक मान्यता प्राप्त पत्रकार के रूप में उन्होंने केंद्रीय गृह, रक्षा, रेलवे, सड़क परिवहन, श्रम एवं रोजगार, जलशक्ति और कृषि जैसे प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को कवर किया है।

विभिन्न समाचार पत्रों में योगदान:

  • अमर उजाला एवं दैनिक जागरण: पत्रकारिता के शुरुआती वर्षों का अनुभव।
  • शाह टाइम्स: न्यूज़ एडिटर (News Editor) के पद पर सेवाएं।
  • हरिभूमि (दिल्ली): वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्य।

राजनीति विज्ञान और कृषि विषयों के जानकार होने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य और खेल के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता 

  • स्नातक (Graduate)
  • B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन)
  • पत्रकारिता में डिप्लोमा (Diploma in Journalism)
  • साहित्य रत्न
  • कृषि विशारद

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