प्रिया रानी की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है, जो बिहार के फुलवारी शरीफ के कुरकुरी गांव से आती हैं। बचपन में गांव वालों द्वारा पढ़ाई करने से रोकने के बावजूद, उन्होंने अपने दादा और पिता के सहारे अपने सपने पूरे किए और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 69 हासिल कर आईएएस अफसर बनीं। प्रिया के पिता अभय कुमार एक किसान हैं और माता गृहिणी। गांव का माहौल लड़कियों की पढ़ाई के लिए अनुकूल नहीं था, लेकिन उनके दादा सुरेंद्र प्रसाद शर्मा ने उन्हें पटना भेजकर अच्छी पढ़ाई करवाई। प्रिया ने डॉन बॉस्को स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा और सेंट माइकल स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने रांची के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS) मेसरा से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।

शिक्षा पूरी होने के बाद प्रिया को बेंगलुरु की एक बड़ी कंपनी में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिली, लेकिन उनका असली लक्ष्य देश की सेवा करना था। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित थी; वे सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई शुरू करती थीं और विशेष रूप से इकोनॉमिक्स पर ध्यान देती थीं। प्रिया ने अपनी तैयारी NCERT किताबों, अखबारों और सरकारी रिपोर्ट्स पर आधारित की। उन्होंने कुल चार बार यूपीएससी परीक्षा दी, जिसमें दूसरी बार उन्हें इंडियन डिफेंस सर्विस (IDES) में चयन मिला।


हालांकि, वह आईएएस अफसर बनने के अपने सपने के प्रति दृढ़ थीं और लगातार मेहनत करती रहीं। चौथे प्रयास में उन्होंने 69वीं रैंक हासिल की और बिहार कैडर में आईएएस अफसर बनीं। प्रिया रानी ने इंटरव्यू में 193 अंक प्राप्त किए। इंटरव्यू का एक दिलचस्प पल तब आया, जब पैनल ने उनसे पूछा, "ऐसा कौन-सा सवाल है जो हमने आपसे नहीं पूछा?" प्रिय ने मुस्कुराते हुए कहा कि शायद आप मुझसे मेरा परिचय सुनना चाहेंगे। इस समझदारी भरे जवाब ने पैनल को भी प्रभावित किया।

उनकी सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो कठिनाइयों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद अपने लक्ष्यों को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रिया का मानना है कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है और मेहनत का कोई विकल्प नहीं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का समर्थन—विशेषकर पिता और दादा का—and खुद की लगन से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। प्रिया की कहानी न केवल बिहार में, बल्कि पूरे देश में लड़कियों के लिए एक मिसाल बन चुकी है। उनके संघर्ष ने यह साबित किया कि चुनौतियों के बावजूद सपनों को साकार किया जा सकता है। आज वे अपने गांव और राज्य के लिए गर्व का विषय हैं, और उनकी कहानी हमें सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में हार न मानकर लगातार मेहनत करनी चाहिए।


Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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