नीतीश कुमार के बेटे को लेकर बिहार की राजनीति में नई हलचल; पोस्टर ने बढ़ाई चर्चाएं
पटना में लगे पोस्टरों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। परिवारवाद के विरोधी माने जाने वाले नीतीश कुमार की चुप्पी ने बिहार की राजनीति में उत्तराधिकार और संभावित सियासी बदलाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Nitish Kumar familyism controversy : नए साल की दहलीज पर बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग ने सियासी गलियारों में चर्चा को हवा दे दी है। पटना में लगाए गए पोस्टरों ने न सिर्फ जदयू के भीतर बल्कि पूरे राज्य में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या परिवारवाद के मुखर विरोधी रहे नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख बदल सकते हैं।
राजधानी पटना में जगह-जगह लगे इन पोस्टरों के जरिए निशांत कुमार से राजनीति में कदम रखने की अपील की गई है। बताया जा रहा है कि ये पोस्टर छात्र जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से लगाए गए हैं। पोस्टरों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर के साथ नव वर्ष की शुभकामनाएं दर्ज हैं और शायरी के अंदाज में यह संदेश दिया गया है कि बिहार की जनता निशांत कुमार को राजनीति में देखना चाहती है। पोस्टर में लिखा गया है कि अगली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी अब निशांत कुमार को संभालनी चाहिए।
इन पोस्टरों में साफ तौर पर यह भी कहा गया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सुरक्षित है और अब पार्टी की अगली पीढ़ी का भविष्य गढ़ने का समय आ गया है। खास बात यह है कि 31 दिसंबर 2025 को जदयू कार्यालय पर यह पोस्टर लगाए गए, जिससे नए साल में संभावित सियासी बदलावों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। माना जाता है कि नीतीश कुमार परिवारवाद की राजनीति के कट्टर आलोचक रहे हैं और यही वजह है कि इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी को बेहद अहम माना जा रहा है। सियासी जानकारों के अनुसार, यदि निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई फैसला होता है, तो उसका अंतिम निर्णय स्वयं मुख्यमंत्री ही लेंगे।
दूसरी ओर, निशांत कुमार से जब भी राजनीति में आने को लेकर सवाल किया गया है, उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और चुप्पी साधे रखी है। जदयू के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी घोषित करने की मांग भी सामने आती रही है, लेकिन पार्टी स्तर पर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
पटना में लगे पोस्टरों ने यह साफ कर दिया है कि नए साल की शुरुआत के साथ ही बिहार की राजनीति में उत्तराधिकार और नेतृत्व को लेकर बहस और तेज होने वाली है। अब सभी की निगाहें नीतीश कुमार के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह सियासी हलचल केवल चर्चा तक सीमित रहेगी या बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत साबित होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
