Nishant Kumar Bihar Health Minister : बिहार की सियासत और प्रशासनिक हलकों में इन दिनों एक अभूतपूर्व बदलाव की बयार बह रही है, जिसकी धुरी सूबे के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार बने हुए हैं। मई 2026 में स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान संभालने वाले 50 वर्षीय निशांत कुमार, जो कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र हैं, को अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों में तीखी आलोचनाओं और सोशल मीडिया पर भारी मखौल का सामना करना पड़ा था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के एक कार्यक्रम से जुड़े उनके कुछ वीडियो वायरल होने और सार्वजनिक भाषणों में '1925 के चुनाव में जीत' जैसी तथ्यात्मक त्रुटियों के चलते उन्हें विपक्षी दलों और नेटिजन्स के निशाने पर आना पड़ा था। लेकिन इस शुरुआती झटके और राजनीतिक घेराबंदी से विचलित हुए बिना, नए स्वास्थ्य मंत्री ने जमीनी स्तर पर एक ऐसी कार्यशैली अपनाई है जिसने आलोचकों को भी अपनी राय बदलने पर मजबूर कर दिया है।

प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब स्वास्थ्य मंत्री ने पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) का बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक औचक निरीक्षण किया। इस औचक दौरे के दौरान उन्होंने अस्पताल के भीतर फैली गंभीर अव्यवस्थाओं, ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों की भारी अनुपस्थिति और मरीजों से की जा रही अवैध वसूली (ओवरचार्जिंग) के खेल को रंगे हाथों पकड़ लिया। अस्पताल के भीतर ही उन्होंने मेडिकल स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और ऑन-द-स्पॉट कड़े निर्देश जारी किए। इसके तुरंत बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निशांत कुमार ने केवल कमियां ही नहीं गिनाईं, बल्कि राज्य की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ट्रॉमा केयर सेंटर्स के आधुनिकीकरण और डॉक्टरों की शत-प्रतिशत जवाबदेही तय करने का एक व्यापक और विस्तृत रोडमैप जनता के सामने रख दिया।

इस प्रशासनिक तत्परता और सख्त तेवरों का असर यह हुआ कि सोशल मीडिया और आम जनता के बीच उनके प्रति नजरिया पूरी तरह पलट गया। जिन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कुछ दिनों पहले तक उनका मजाक उड़ाया जा रहा था, वहीं अब उनकी कर्मठता, सादगी और जमीनी पकड़ की जमकर सराहना की जा रही है। जनता के एक बड़े वर्ग का कहना है कि बिहार ने बीते कई दशकों में स्वास्थ्य क्षेत्र में इतनी संवेदनशीलता और सक्रियता दिखाने वाला मंत्री नहीं देखा है। हालांकि, इस सकारात्मक माहौल के बीच राजनीतिक विश्लेषकों और कुछ संशयवादियों का एक धड़ा अब भी उनके पास किसी मेडिकल पृष्ठभूमि (नॉन-मेडिकल बैकग्राउंड) के न होने पर सवाल उठा रहा है। बहरहाल, मंत्री के इस त्वरित एक्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साफ हो गया है कि वे आने वाले समय में बिहार के सरकारी अस्पतालों की तस्वीर बदलने के लिए पूरी तरह कमर कस चुके हैं, जिसका सीधा असर राज्य की आने वाली राजनीति और जनमानस पर पड़ना तय है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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