Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे नजदीक आते ही देश का सबसे चर्चित भूमिगत सट्टा बाजार फलोदी सट्टा बाजार एक बार फिर सुर्खियों में है। एग्जिट पोल के बाद इस बाजार में दांव-पेच की रफ्तार तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में जहां उम्मीदवार और पार्टियां नतीजों की गणना में जुटी हैं, वहीं फलौदी में हर घंटे आंकड़े और ऑड्स बदल रहे हैं। लेकिन इस अफरातफरी के बीच एक सवाल अब भी बरकरार है आखिर इस सट्टा बाजार का मालिक कौन है और इसके पास कितना पैसा है?

फलोदी सट्टा बाजार का रहस्य :

फलौदी सट्टा बाजार का “मालिक” दरअसल कोई एक व्यक्ति नहीं है। यह किसी कंपनी या कानूनी संस्था की तरह पंजीकृत इकाई नहीं, बल्कि स्थानीय सट्टेबाजों, एजेंटों और दलालों का एक गुप्त नेटवर्क है जो पीढ़ियों से इस व्यवसाय को चला रहा है। प्रत्येक सट्टेबाज के अपने ग्राहक, अपने नियम और अपनी गणना होती है। इस बाजार की यही अनौपचारिक और छिपी हुई संरचना इसे रहस्यमयी बनाती है।

भारतीय कानून के तहत सट्टेबाजी अवैध है, इसलिए इस नेटवर्क में शामिल लोगों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। धन का प्रवाह भी गुप्त चैनलों के माध्यम से होता है, जिससे यह तय करना लगभग असंभव हो जाता है कि इस बाजार में कितनी राशि घूम रही है या इसके पीछे वास्तविक संचालक कौन हैं।

कैसे हुई शुरुआत :

फलोदी का सट्टे से रिश्ता करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। इसका उद्गम राजनीति या खेलों से नहीं, बल्कि बारिश की भविष्यवाणी से हुआ था। थार रेगिस्तान के इस सूखे क्षेत्र में लोग यह दांव लगाते थे कि कब और कहां बारिश होगी। स्थानीय लोग तालाबों, झरनों और छतों पर गिरती बूंदों पर तक सट्टा लगाते थे।

समय के साथ इस परंपरा ने आधुनिक रूप ले लिया। जब रेडियो पर क्रिकेट प्रसारण शुरू हुआ, तो दांव का केंद्र खेल बन गया। 1970 के दशक में राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी कवरेज के बढ़ने के साथ फलोदी ने नया मोड़ लिया अब यहां चुनाव परिणामों पर सट्टा लगाया जाने लगा।

कैसे चलता है चुनावी सट्टा :

फलोदी सट्टा बाजार की कार्यप्रणाली किसी स्टॉक एक्सचेंज से कम नहीं। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां दांव राजनीति पर लगता है। किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी, कौन मुख्यमंत्री बनेगा, कौन टिकट पाएगा हर सवाल पर यहां करोड़ों के दांव लगाए जाते हैं। बाजार में “खाना” और “लगाना” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सट्टे की दिशा बताने के लिए किया जाता है।

यह पूरा सिस्टम बिना किसी लिखित अनुबंध या कानूनी सुरक्षा के भरोसे पर चलता है। स्थानीय सट्टेबाजों के नेटवर्क के जरिए रकम का लेनदेन होता है और बाजार के रुझान इस बात पर निर्भर करते हैं कि जनता का झुकाव किस ओर है।

गुमनामी में छिपा अरबों का खेल :

आज फलोदी सट्टा बाजार न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में चुनावी परिणामों की “पहली झलक” देने के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसकी गुप्त प्रकृति और कानूनी जोखिमों के चलते इसमें शामिल लोगों की पहचान कभी सामने नहीं आती। फिर भी, यह बाजार हर चुनाव के साथ नए जोश, नई गणनाओं और अरबों के लेनदेन के साथ जीवित रहता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story