पुल के पाया नंबर 133 के पास स्लैब गिरने से 16 जिलों का संपर्क टूटा और वाहनों को मुंगेर के रास्ते 140 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।

Bihar bridge collapse news today : बिहार की जीवनरेखा कहे जाने वाले और उत्तर व दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर सोमवार की अलसुबह एक बड़ा हादसा घटित हुआ। पुल के पाया नंबर 133 के समीप लगभग 25 से 33 मीटर लंबा कंक्रीट का स्लैब अचानक भरभराकर सीधे गंगा नदी में गिर गया। गनीमत यह रही कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के कारण स्लैब गिरने से चंद मिनट पहले ही पुल पर आवाजाही रोक दी गई थी, जिससे एक बड़ा जानमाल का नुकसान होते-होते बच गया। वर्ष 2001 में आम जनता के लिए खोले गए इस 4.7 किलोमीटर लंबे सेतु के क्षतिग्रस्त होने से राज्य की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल का हिस्सा गिरते ही एक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते विशाल स्लैब नदी की लहरों में ओझल हो गया।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से पूरे पुल को वाहनों के आवागमन के लिए बंद कर दिया है। यह पुल न केवल भागलपुर बल्कि आसपास के 16 जिलों के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ से प्रतिदिन औसतन 50,000 वाहन गुजरते हैं। पुल बंद होने के कारण अब वाहन चालकों को मुंगेर गंगा ब्रिज के रास्ते लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रियों को लगभग 140 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और यात्रा के समय में चार घंटे का इजाफा हो गया है। इस घटना के बाद स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है, क्योंकि इसी वर्ष मार्च के महीने में पुल के नीचे कटाव की समस्या सामने आई थी। उस समय अधिकारियों ने इसे तकनीकी रूप से 'गैर-संरचनात्मक' बताते हुए गंभीर मरम्मत की जरूरत को खारिज कर दिया था।


इस घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलों के निर्माण और उनके रखरखाव पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है।

बिहार में पिछले कुछ वर्षों में पुल ढहने की कई घटनाओं ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। अधिकारियों का कहना है कि उच्च स्तरीय जांच टीम जल्द ही संरचनात्मक विफलता के कारणों का पता लगाएगी, लेकिन तब तक 16 जिलों के हजारों लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित रहेगी। यह हादसा न केवल बुनियादी ढांचे की जर्जर स्थिति को दर्शाता है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति बरती जा रही घोर लापरवाही की ओर भी इशारा करता है, जिसकी कीमत अब आम जनता को चुकानी पड़ रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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