औरंगाबाद जिले ने टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत अपनी उल्लेखनीय प्रगति से राज्य स्तर पर विशेष पहचान बनाई है। सोमवार को मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में औरंगाबाद जिले के शानदार प्रदर्शन की जमकर सराहना की गई। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

समीक्षा के दौरान आधिकारिक तौर पर बताया गया कि औरंगाबाद जिला टीबी मुक्त अभियान में राज्य के शीर्ष-5 जिलों में शुमार हो गया है। जिले की स्वास्थ्य टीम, जिला प्रशासन और सहयोगी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का ही यह परिणाम है कि अब तक जिले में 61,137 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है, जो निर्धारित साप्ताहिक लक्ष्य का 258 प्रतिशत है। बैठक में साझा की गई जानकारी के अनुसार, जिले में 14 अगस्त तक कुल 1,48,838 व्यक्तियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभियान के प्रथम सप्ताह में जिले में केवल 15,000 स्क्रीनिंग ही हो सकी थी, लेकिन निरंतर प्रयासों से यह आंकड़ा अब एक लाख के पार पहुंच चुका है।

मुख्य सचिव ने जिले की इस प्रगति की प्रशंसा करते हुए अभियान की गति और गुणवत्ता को भविष्य में भी बरकरार रखने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी मुक्त भारत अभियान की टीम को हर हाल में सक्रिय और सुदृढ़ बनाए रखा जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश देते हुए कहा कि अभियान में एसडीसी (वरीय उप समाहर्ता) को नोडल की भूमिका में रखा जाए और जन-जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा व्यवहार परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि निर्धारित लक्ष्य को समयबद्ध ढंग से प्राप्त किया जा सके।

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि औरंगाबाद जिले में एनटीपीसी और बीआरबीसीएल सक्रिय रूप से निक्षय मित्र के तौर पर अभियान को अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। इनके माध्यम से टीबी मरीजों को पोषण सहायता एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं, जिससे अभियान को धरातल पर और अधिक मजबूती मिल रही है।

जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, जीविका दीदियों, संबंधित विभागों और निक्षय मित्रों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य मात्र निर्धारित संख्या में स्क्रीनिंग करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक संभावित टीबी मरीज की समय पर पहचान कर उसे गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि जिले को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाया जा सके।

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Pratahkal Newsroom

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