दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की आयु में निधन, संगीत जगत के एक और स्वर्णिम युग का हुआ अंत
हिंदी और मराठी सिनेमा की मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का मुंबई में निधन हो गया है, उन्होंने कई भाषाओं में कालजयी गीतों को अपनी आवाज दी थी।

पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर के दो अलग-अलग दौर के चित्र दिखाई दे रहे हैं, जिनका रविवार को 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया।
Suman Kalyanpur passing away : भारतीय संगीत जगत अभी दिग्गज गायिका आशा भोंसले के निधन (12 अप्रैल) के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि देश ने सुरों की एक और महान साधिका को खो दिया है। सुरमयी आवाज की धनी और संगीत जगत की अनमोल धरोहर सुमन कल्याणपुर का रविवार, 31 मई को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी आवाज में सुर कोकिला लता मंगेशकर जैसी जादुई समानता थी, जिसके कारण अक्सर आम श्रोता उनकी कलात्मक बारीकियों को सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनके जाने से न केवल हिंदी और मराठी सिनेमा बल्कि पूरे भारतीय संगीत जगत में एक अपूरणीय शून्य पैदा हो गया है।
सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को अविभाजित भारत के ढाका (अब बांग्लादेश) में सुमन हेमाडी के रूप में हुआ था। संगीत के प्रति गहरा समर्पण और अपनी विलक्षण प्रतिभा के दम पर उन्होंने हिंदी, मराठी और कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पार्श्वगायन का एक स्वर्णिम सफर तय किया। फिल्मों से इतर, गैर-फिल्मी संगीत में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा; उनके गाए भजन, गजलें, मराठी अभंग और भावगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में रचे-बसे हैं।
मुंबई के सेंट कोलंबा स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुमन ने चित्रकला सीखने के लिए प्रसिद्ध जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया था। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने संगीत की दुनिया में कदम रखा और पंडित केशवराव भोले, उस्ताद खान अब्दुल रहमान खान और मास्टर नवरंग जैसे महान उस्तादों से शास्त्रीय व सुगम संगीत की दीक्षा ली।
उन्हें शुरुआती सफलता वर्ष 1954 में आई फिल्मों 'शुकराची चांदनी' और 'मंगू' से मिली। इसके बाद उन्होंने सफलता की एक ऐसी बुलंद इमारत खड़ी की, जिसने उन्हें भारतीय संगीत के इतिहास में अमर कर दिया। उनके गाए कई गीत आज भी कालजयी माने जाते हैं:
- सदाबहार फिल्मी गीत: 'शराबी शराबी ये सावन का मौसम', 'रहें न रहें हम', 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे', 'ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे', 'ना तुम हमें जानो', और 'परबतों के पेड़ों पर'।
- मराठी संगीत साधना: 'निंबोणीच्या झाडामागे' जैसे भावगीत, जिन्होंने मराठी लोकमानस पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
विशेष रूप से 1960 के दशक की शुरुआत में, जब लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच कुछ मतभेद चल रहे थे, तब सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफी की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक बेहतरीन युगल गीत (Duets) दिए, जो आज भी चाव से सुने जाते हैं।
जैसे ही रविवार को उनके निधन की दुखद खबर फैली, राजनीतिक और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता शरद पवार और जानी-मानी गायिका फैयाज ने सबसे पहले अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
शोक व्यक्त करते हुए शरद पवार ने कहा, "सुमन कल्याणपुर जी के निधन की खबर अत्यंत हृदयविदारक है। उन्होंने अपनी मधुर, सुरीली और रूहानी आवाज से भारतीय संगीत की दुनिया को समृद्ध किया। हिंदी, मराठी और कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उनके अमर गीतों ने पीढ़ियों के दिलों पर राज किया है। उनके जाने से भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के एक स्वर्ण युग का अंत हो गया है। मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।"
पारिवारिक जीवन की बात करें तो, सुमन जी ने वर्ष 1958 में व्यवसायी रामानंद कल्याणपुर से विवाह किया था। उनके परिवार में अब उनकी बेटी चारु अग्नि हैं। सुमन कल्याणपुर का जाना केवल एक गायिका का जाना नहीं, बल्कि सुरों के उस स्वर्णिम अध्याय का बंद होना है, जिसकी गूंज आने वाली कई सदियों तक भारतीय संगीत के आकाश में गूंजती रहेगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
