Union Minister for Environment : अमेज़न के घने जंगलों की हरियाली के बीच, जहां पृथ्वी की फेफड़ों की धड़कन साफ सुनाई देती है, वहां भारत ने कॉप-30 के उच्च स्तरीय सत्र में वैश्विक जलवायु राजनीति को हिला देने वाला बयान दिया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने विकसित देशों को सीधी चेतावनी दी कि अब अरबों नहीं, खरबों डॉलर की जलवायु वित्त सहायता चाहिए, नेट-जीरो लक्ष्य को समय से बहुत पहले हासिल करना होगा और कॉप-30 को “अमल का कॉप” तथा “वादों की पूर्ति का कॉप” बनाना होगा, वरना ये सम्मेलन सिर्फ़ सुर्खियां बनकर रह जाएंगे।


ब्राजील सरकार और अमेज़न क्षेत्र के लोगों का आभार जताते हुए यादव ने कहा कि अमेज़न पृथ्वी की पर्यावरणीय संपदा का जीवंत प्रतीक है और ऐसे पवित्र स्थान पर हो रहा यह सम्मेलन वैश्विक जलवायु जिम्मेदारी की गंभीरता को रेखांकित करता है। उन्होंने बेबाकी से कहा कि विकसित देशों ने अब तक अपने वादों पर पर्याप्त प्रगति नहीं दिखाई है, जबकि जलवायु संकट तेजी से बढ़ रहा है। उनका साफ संदेश था – मौजूदा समय-सीमा से काफी पहले नेट-जीरो हासिल करो, नई, अतिरिक्त और रियायती जलवायु वित्त सहायता खरबों के स्तर पर दो, और जलवायु तकनीक को बौद्धिक संपदा के बंधनों से मुक्त कर सभी देशों के लिए सुलभ व किफायती बनाओ।


भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मंत्री ने गर्व से बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सिद्ध कर दिया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। वर्ष 2005 की तुलना में भारत ने उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत से अधिक की कमी की है, कुल विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी आधी से अधिक हो चुकी है और राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) का लक्ष्य 2030 से पांच साल पहले ही पूरा कर लिया है। भारत अपना संशोधित NDC वर्ष 2035 तक समय पर घोषित करेगा और पहला द्विवार्षिक पारदर्शिता प्रतिवेदन भी समय पर सौंपेगा।


अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, न्यूक्लियर मिशन और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भारत की 2070 नेट-जीरो यात्रा का मजबूत आधार बताते हुए यादव ने खुलासा किया कि पेरिस समझौते के अनुरूप कार्बन सिंक बढ़ाने के लिए सामुदायिक भागीदारी से सिर्फ सोलह महीनों में दो अरब से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं – यह सामूहिक जलवायु प्रयासों की असली ताकत है।


भूपेंद्र यादव का यह बयान कॉप-30 के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अमेज़न की हरियाली के बीच गूंजी यह भारतीय आवाज़ न सिर्फ विकासशील देशों की उम्मीद बनी है, बल्कि विकसित दुनिया को आईना दिखा रही है कि अब वक्त बातों का नहीं, ठोस अमल का है। अगर कॉप-30 सचमुच “अमल का कॉप” बना, तो यह पृथ्वी के भविष्य को बचाने की दिशा में सबसे बड़ी जीत होगी।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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