नेपाल संकट पर शक की सुई CIA पर; Gen-Z ने खोला राज़
US Involvement in Nepal Politics पर उठे सवाल, ओली सरकार के पतन से लेकर मस्टैंग गुरिल्ला बल तक छिपे पुराने राज

नेपाल में जारी राजनीतिक संकट के बीच अमेरिका की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री केपी ओली को अचानक इस्तीफा देना पड़ा और सेना के समर्थन से सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर US Involvement in Nepal Politics को लेकर शंकाओं को जन्म दिया है।
अमेरिका का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड :
ऐतिहासिक रूप से अमेरिका नेपाल में गुप्त ऑपरेशनों के लिए सक्रिय रहा है। शीत युद्ध के दौरान चीन के खिलाफ अपनी रणनीति के तहत अमेरिका ने नेपाल में खुफिया जानकारी इकट्ठा की, दुष्प्रचार अभियान चलाए और अर्धसैनिक गतिविधियों को संचालित किया। 1971 में निक्सन प्रशासन की सीक्रेट कमेटी के दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ था। इसी दौरान अमेरिका ने नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों को हथियार और ट्रेनिंग देकर चीन विरोधी मस्टैंग गुरिल्ला बल खड़ा किया था। यह उदाहरण आज भी US Involvement in Nepal Politics का अहम सबूत माना जाता है।
9/11 के बाद नेपाल में अमेरिकी प्रभाव :
साल 2001 के आतंकी हमलों के बाद अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर नेपाल में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत की। माओवादी विद्रोहियों को आतंकी घोषित कर अमेरिका ने काठमांडू को भारी सैन्य मदद दी। हजारों M-16 राइफलें नेपाल भेजी गईं और अमेरिकी दूतावास में डिफेंस कोऑपरेशन ऑफिस की स्थापना हुई। इससे नेपाली सेना का आकार लगभग दोगुना हो गया। यह सब US Involvement in Nepal Politics का हिस्सा माना जाता है।
ओली सरकार के पतन में शक :
केपी ओली की सरकार का अचानक गिरना इस बहस को और गहरा करता है। कई वरिष्ठ पत्रकार और अधिकारी मानते हैं कि इतनी बड़ी हलचल बिना बाहरी ताकत के संभव नहीं थी। खास बात यह है कि आंदोलन में कोई बड़ा नेपाली नेता सामने नहीं आया। कई लोग इसे भी US Involvement in Nepal Politics से जोड़कर देख रहे हैं।
क्या वॉशिंगटन ने चाबी घुमाई ?
फिलहाल सबूत सीमित हैं, लेकिन नेपाल के इतिहास को देखते हुए यह मानना कठिन नहीं कि अमेरिका ने इस बार भी पर्दे के पीछे से खेल खेला हो। सवाल यह है कि क्या वॉशिंगटन ने नेपाल की सत्ता बदलने की चाबी घुमाई? आने वाला वक्त ही इसका जवाब देगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
