राज ज्वेलर वसूली मामला : हाईकोर्ट से जीआरपी के तीन पुलिसकर्मियों को अग्रिम जमानत
मामला मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर राजस्थान से आए एक ज्वेलर से कथित धमकी, मारपीट और पैसों की वसूली से जुड़ा है

मुंबई। राजधानी मुंबई में बीते महीने सामने आए एक सनसनीखेज वसूली प्रकरण में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के तीन पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी। अदालत ने इन तीनों आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए माना कि शिकायत में लगाए गए आरोप “अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर” प्रस्तुत किए गए हैं। मामला मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर राजस्थान से आए एक ज्वेलर से कथित धमकी, मारपीट और पैसों की वसूली से जुड़ा है, जिसने पुलिस महकमे और समाज दोनों को झकझोर दिया था।
न्यायमूर्ति नितिन बोरकर ने तीनों आरोपियों — राहुल भोसले, ललित जगताप और अनिल राठोड़ — को अग्रिम जमानत का लाभ देते हुए स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान इनकी गिरफ्तारी होती है तो इन्हें प्रत्येक को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर तुरंत रिहा किया जाएगा। अदालत ने साथ ही यह भी शर्त रखी कि आरोपियों को किसी भी परिस्थिति में गवाहों से संपर्क नहीं करना चाहिए और उन्हें 17 से 19 सितंबर तक दोपहर 2 बजे जांच अधिकारी के समक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा।
यह मामला 3 अगस्त को दर्ज की गई उस एफआईआर से जुड़ा है जिसमें शिकायतकर्ता ज्वेलर ने आरोप लगाया था कि वह मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पहुंचा ही था कि तीनों जीआरपी पुलिसकर्मियों ने उसे रोका। आरोप के अनुसार, उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते हुए उसके साथ मारपीट की गई और जबरन उससे रकम वसूली गई। इस शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 119(1) के तहत मामला दर्ज हुआ। यह धारा उस स्थिति में लागू होती है जब किसी को गंभीर चोट पहुंचाकर उससे जबरन धन की वसूली की जाए या उसे किसी अपराध के लिए विवश किया जाए। इस अपराध में अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई थी। आरोप लगने के बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। हालांकि 26 अगस्त को सत्र न्यायालय ने इनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने माना था कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद आरोपी पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपनी गिरफ्तारी से बचाव की गुहार लगाई।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अनीकेत निकम ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने घटना के छह दिन बाद एफआईआर दर्ज कराई, जिससे आरोपों की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने अदालत को बताया कि पुलिस सेवा में लंबे समय से रह रहे आरोपियों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और अटकलों पर आधारित हैं। निकम ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए वसूली और पैसे लेने के आरोपों को सीसीटीवी फुटेज से खारिज किया जा सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि इस मामले को केवल अनुमान और संदेह पर खड़ा किया गया है और तथ्यात्मक आधार नगण्य हैं।
बचाव पक्ष की इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल आरोपियों को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की जाए। अदालत ने साफ किया कि यह अंतरिम राहत केवल जांच को निष्पक्ष और निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने के लिए है और विस्तृत आदेश बाद में उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर शिकायतकर्ता ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं अदालत में दी गई दलीलों ने मामले की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थल पर इस तरह की घटना का घटित होना यात्रियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करता है।
राजस्थान से आए ज्वेलर ने जो आरोप लगाए थे, उसने समाज में खासी हलचल पैदा की थी। आरोप के अनुसार, उसे न केवल धमकाया गया बल्कि उसके साथ शारीरिक हिंसा भी हुई। शिकायतकर्ता का कहना था कि आरोपियों ने उसके साथ मारपीट कर उसे मजबूर किया कि वह रकम सौंप दे। इस शिकायत को आधार बनाकर दर्ज की गई एफआईआर ने तीनों पुलिसकर्मियों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
फिलहाल अदालत के आदेश ने इन पुलिसकर्मियों को राहत जरूर दी है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों पर अब निष्पक्ष और ठोस जांच की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। अदालत ने आरोपियों को यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे किसी भी रूप में गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास न करें और जांच में पूर्ण सहयोग करें।
इस मामले ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े लोग भी अगर आरोपों के घेरे में आते हैं, तो न्यायिक प्रक्रिया कितनी अहम हो जाती है। फिलहाल समाज की निगाहें आगे आने वाले विस्तृत आदेश और जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
