भारत का गगनयान मिशन बना और भी हाईटेक ; DRDO की दोहरी कामयाबी
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों में DRDO ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। संगठन ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष फूड और पैराशूट सिस्टम विकसित कर सफल परीक्षण पूरे कर लिए हैं।

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारी में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इस ऐतिहासिक मिशन के लिए विशेष अंतरिक्ष भोजन (Space Food) और पैराशूट सिस्टम विकसित कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ भारत का मानव मिशन अब और अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर दिशा में बढ़ रहा है।
DRDO के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार महानिदेशक डॉ. बी.के. दास ने जानकारी दी कि संगठन ने इन तकनीकों का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया, “हमने गगनयान मिशन के लिए ऐसे विशेष फूड और पैराशूट सिस्टम तैयार किए हैं, जिन पर अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह भरोसा कर सकेंगे। परीक्षण बेहद सफल रहे हैं और कुछ अंतिम सुधारों के बाद इन्हें ISRO को सौंप दिया जाएगा।”
गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) पहली बार देश के अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन की सफलता में DRDO का योगदान बेहद अहम है, क्योंकि यह संगठन अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा, भोजन, और जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support Systems) से जुड़ी तकनीकों पर काम कर रहा है।
डॉ. दास ने बताया कि DRDO और ISRO के बीच पिछले कई महीनों से कई स्तरों पर समन्वय चल रहा है। “हमने कुछ ऐसी तकनीकें विकसित की हैं जिनका उपयोग न केवल अंतरिक्ष मिशनों में बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी किया जा सकता है,” उन्होंने कहा।
सूत्रों के मुताबिक, DRDO का विकसित किया गया पैराशूट सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया है कि अंतरिक्ष यान के रिटर्न फेज में यह अत्यधिक तापमान और दबाव झेल सके। वहीं, स्पेस फूड में ऐसी विशेष पोषण सामग्री शामिल की गई है जो कम गुरुत्वाकर्षण (microgravity) वाले वातावरण में भी शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और जल स्तर बनाए रखने में मदद करती है।
इस बीच, ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने भी बताया कि गगनयान मिशन के लगभग 85 से 90 प्रतिशत सबसिस्टम कार्य पूरे हो चुके हैं। वर्तमान में सभी प्रमुख हिस्सों का सॉफ्टवेयर वेरिफिकेशन और इंटीग्रेशन टेस्टिंग जारी है। तीन बिना चालक दल वाले मिशन पहले लॉन्च किए जाएंगे ताकि सुरक्षा और विश्वसनीयता का पूरा मूल्यांकन किया जा सके।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो भारत का बहुप्रतीक्षित मानवयुक्त गगनयान मिशन वर्ष 2027 में लॉन्च किया जाएगा और उस उड़ान में DRDO की तकनीकें अंतरिक्ष यात्रियों की सबसे बड़ी सुरक्षा कवच बनेंगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
