भारत की ऐतिहासिक छलांग; ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दुनिया का दूसरा देश
भारत ने कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से रचा इतिहास। रूस के बाद यह उपलब्धि पाने वाला दूसरा देश बना। जानें कैसे थोरियम से बदलेगी देश की ऊर्जा सुरक्षा।

कल्पक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की गुलाबी और हरी मुख्य इमारत का बाहरी दृश्य
Prototype Fast Breeder Reactor Kalpakkam : भारत ने वैश्विक परमाणु ऊर्जा के मानचित्र पर एक ऐसी ऐतिहासिक लकीर खींच दी है, जिसने विकसित देशों को भी अचंभित कर दिया है। तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित स्वदेशी 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (PFBR) ने पहली बार सफलतापूर्वक "क्रिटिकलिटी" हासिल कर ली है। परमाणु शब्दावली में इसका अर्थ है कि रिएक्टर के भीतर एक नियंत्रित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया (Nuclear Chain Reaction) विधिवत रूप से शुरू हो चुकी है। यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा देखे गए उस स्वप्न की पूर्णता है, जिसमें भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की परिकल्पना की गई थी। इस मील के पत्थर के साथ ही भारत, रूस के बाद दुनिया का केवल दूसरा ऐसा देश बन गया है जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर तकनीक का संचालन करने की क्षमता रखता है।
तकनीकी रूप से यह 500 मेगावाट क्षमता वाला रिएक्टर किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि यह अपनी कार्यप्रणाली के दौरान जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे कहीं अधिक नया ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। यह रिएक्टर भारत की 'तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा योजना' के दूसरे और सबसे महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग किया जाता है, जो प्रक्रिया के दौरान यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित कर देता है। यह "क्लोज्ड फ्यूल साइकिल" मॉडल पर आधारित है, जहाँ इस्तेमाल किए गए ईंधन को कचरा मानकर फेंकने के बजाय उसे पुनर्चक्रित कर दोबारा ऊर्जा उत्पादन में लगाया जाता है।
यह सफलता भारत के भविष्य के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तीसरे चरण के लिए रास्ता साफ करती है, जहाँ भारत के पास मौजूद थोरियम के विशाल भंडार का उपयोग किया जा सकेगा। वर्तमान में भारत की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है, जिसे वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 100 गीगावाट तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। सरकार इस दिशा में 'न्यूक्लियर एनर्जी मिशन' के तहत 20,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रही है। इसमें न केवल बड़े रिएक्टर, बल्कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि देश के कोने-कोने तक स्वच्छ और सस्ती बिजली पहुँचाई जा सके।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) April 7, 2026
रूस के बाद हम दुनिया के दूसरे ऐसे देश बन गए हैं जिसका व्यावसायिक स्तर का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित होने जा रहा है; जबकि चीन का CFR-600 अभी केवल 'डेमोन्स्ट्रेशन स्टेज' पर है।
कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी… pic.twitter.com/9HFYqvg7V8
अंततः, कल्पक्कम से उठी यह परमाणु ऊर्जा की लहर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा का नया अध्याय है। जहां दुनिया अभी भी जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने के रास्ते तलाश रही है, वहीं भारत ने अपनी स्वदेशी तकनीक के दम पर भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा का वह द्वार खोल दिया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए निरंतर और निर्बाध बिजली सुनिश्चित करेगा। यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिकों की मेधा और वैश्विक परमाणु ऊर्जा मंच पर देश के बढ़ते दबदबे का जीवंत प्रमाण है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
