वसई में 8 करोड़ की हेरोईन जब्त; तस्करी में पाकिस्तान नेटवर्क का हाथ
वसई में एमबीवीवी पुलिस ने पाकिस्तान से लाई गई 8 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोईन जब्त कर अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से एक ने सीमा पार से नशा लाने की बात कबूल की है।

मुंबई। पालघर जिले के वसई इलाके में पुलिस ने एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय नशा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसने न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देशभर में खलबली मचा दी है। मीरा-भायंदर वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस की अपराध शाखा ने 2.11 किलोग्राम हेरोईन जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 8.04 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से एक प्रमुख तस्कर ने पाकिस्तान से नशा लाने की बात कबूल की है।
वसई से राजस्थान तक फैला नेटवर्क :
11 सितंबर को एमबीवीवी पुलिस ने वसई पूर्व के फादरवाड़ी क्षेत्र में छापेमारी कर राजस्थान निवासी तीन व्यक्तियों—समुंदरसिंह रूपसिंह देवड़ा (49), युवराजसिंह भवानी सिंह राठोड़ (28) और तकतासिंह करणसिंह राजपूत (38)—को हिरासत में लिया था। इन आरोपियों के पास से हेरोईन के साथ एक स्विफ्ट कार और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। पुलिस ने तत्काल एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज) कानून के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू की।
सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) मदन बल्लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती पूछताछ में ही आरोपियों से अहम सुराग मिले। पुलिस की जांच का दायरा वसई से निकलकर राजस्थान तक जा पहुंचा और एक बड़े तस्करी गिरोह की कड़ियां सामने आने लगीं।
सरगना की गिरफ्तारी :
पुलिस की जांच में पता चला कि इस गिरोह का मुख्य सूत्रधार राजस्थान के जैसलमेर जिले के सत्तू गांव का रहने वाला हरीसिंह तेजसिंह रावलोटी भाटी (55) है। पुलिस टीम ने सतर्कता और रणनीति के तहत 25 सितंबर को राजस्थान के मंदार से भाटी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान भाटी ने स्वीकार किया कि वह पाकिस्तान से तस्करी के जरिए हेरोईन मंगाता था और इसे विभिन्न राज्यों में सप्लाई करता था। इस स्वीकारोक्ति ने नशा तस्करी के उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोल दीं, जिसमें सीमा पार से नशा भारत में प्रवेश कर रहा था। भाटी के पाकिस्तान से जुड़े होने की जानकारी ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया है।
कानून की सख्ती और आगे की जांच :
वालीव पुलिस स्टेशन में दर्ज एनडीपीएस मामले के तहत अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच चल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस खेप को भारत में किन-किन राज्यों तक पहुंचाया जाना था और इसमें और कौन-कौन शामिल है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अन्य संभावित सहयोगियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और डिजिटल उपकरणों से भी अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
समाज पर असर और पुलिस की चुनौती :
नशा तस्करी का यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह समाज और युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे खतरे की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। हेरोईन जैसी घातक मादक पदार्थ का करोड़ों रुपये का कारोबार यह दर्शाता है कि किस तरह से तस्कर सीमाओं को पार कर नशे का जाल फैला रहे हैं। इस जाल का असर समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—युवाओं—पर पड़ता है, जिन्हें यह लत अपराध और बर्बादी की ओर धकेल देती है। एमबीवीवी पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने न सिर्फ करोड़ों रुपये मूल्य का नशा जब्त किया, बल्कि उस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का रास्ता भी खोल दिया, जो सीमा पार से भारत में सक्रिय था।
वसई में हुई यह कार्रवाई इस बात की गवाही देती है कि महाराष्ट्र पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम कर रही है। पाकिस्तान से भारत तक फैले इस नशा तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ न सिर्फ कानून-व्यवस्था की बड़ी सफलता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि अपराध चाहे जितना संगठित और अंतरराष्ट्रीय क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना संभव नहीं है। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नशे के खिलाफ जंग लंबी और कठिन है, लेकिन पुलिस की दृढ़ इच्छाशक्ति और सतर्कता से यह लड़ाई जीती जा सकती है। वसई से लेकर राजस्थान तक फैली इस तस्करी कड़ी के टूटने से आने वाले समय में कई और खुलासे होने की उम्मीद है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
