मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों ने हाल ही में 4,000 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छू लिया है, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक अस्थिरताओं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सोने की इस तेजी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों का ध्यान खींचा है। चालू वित्त वर्ष में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि भारत में यह उछाल और भी अधिक है, जहां चालू वित्त वर्ष में सोने की कीमतों में 37.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। केवल अक्टूबर के पहले आठ दिनों में ही पीली धातु की कीमतों में 6 प्रतिशत की तेजी देखी गई।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अब मुनाफ़ा वसूली के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी शटडाउन की संभावना, इज़राइल और हमास के बीच शांति समझौते के प्रयास और डॉलर इंडेक्स के बढ़ते स्तर ने निवेशकों में सतर्कता बढ़ा दी है। डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब, 99 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो सोने और चांदी दोनों में मुनाफ़ा वसूली का संभावित कारण माना जा रहा है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वस्तु एवं मुद्रा व्यापार प्रमुख अनुज गुप्ता के अनुसार, इस सप्ताह डॉलर इंडेक्स में 1.27 प्रतिशत की तेजी देखी गई और यह 98.7 पर कारोबार कर रहा है।

अमेरिका स्थित एल्गोरिथम विश्लेषक निगम अरोड़ा का कहना है कि सोना अत्यधिक खरीदा गया है और इसमें गिरावट का खतरा मौजूद है। उन्होंने डॉलर में मजबूती, अमेरिकी सरकार का संभावित बंद, और फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले को इसके मुख्य कारणों में शामिल किया। इसके अतिरिक्त, फ्रांस और जापान में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है। अगर फ्रांस में नई सरकार बजट पारित करा देती है या जापान में भावी प्रधानमंत्री ब्याज दरों को लेकर बैंक ऑफ जापान पर दबाव नहीं डालती हैं, तो इससे सोने की कीमतों में गिरावट संभव है।

सिर्फ़ सोने ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। अरोड़ा के अनुसार, चांदी सोने की तुलना में 1.7 गुना तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी गिरावट आएगी, यह तेज़ हो सकती है। पिछले दशकों में तेज़ी वाले बाजार में अक्सर अल्पकालिक गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मध्यम और दीर्घकालिक स्तर पर तेजी बनी रही है।

क्वांटम एएमसी के सीआईओ चिराग मेहता के अनुसार, सोने के लिए अंतर्निहित कारक अभी भी सकारात्मक हैं। लेकिन, छोटी अवधि में चालू वित्त वर्ष की 30 प्रतिशत की तेज़ी को देखते हुए, कुछ सुधार की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। उनका मानना है कि निवेशकों में सोने और चांदी के प्रति रुचि मजबूत बनी हुई है और वैश्विक स्तर पर बाजार की सतर्क निगरानी जारी है।

इस तरह, वर्तमान समय में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में अस्थिरता और मुनाफ़ा वसूली की संभावना निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रही है, जबकि लंबी अवधि में पीली धातु का आकर्षण और निवेश में रुचि लगातार बरकरार है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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