पेट्रोल-डीजल ₹15 तक होगा सस्ता? बढ़ती कीमतों के बीच CTI की बड़ी मांग
पश्चिम एशिया संकट के बीच दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 पहुंचा; CTI ने पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिख पूरे देश में फ्लैट 5% वैट लगाने की मांग की।

दिल्ली में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (दाएं) को पत्र लिखकर राज्यों में वैट की दरें कम करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है।
petrol diesel price hike : पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। देश में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल आया है, जिसने आम आदमी से लेकर व्यापारिक जगत तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले महज दस दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब दोनों ईंधनों के दामों में इतनी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस ताजा मूल्यवृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत १०२.१२ रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डीजल भी ९५.२० रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को छू रहा है। लगातार बढ़ते दामों के इस सिलसिले ने बाजार में चौतरफा महंगाई का दबाव बना दिया है।
इस गंभीर होते आर्थिक संकट और लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने आम जनता और व्यापारियों को तुरंत राहत देने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार तुरंत सक्रियता दिखाए और सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों की एक इमरजेंसी बैठक बुलाए। गोयल ने सरकार के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखते हुए कहा है कि अगले तीन महीनों के लिए पूरे देश में पेट्रोल और डीजल पर फ्लैट पांच प्रतिशत वैट (Value Added Tax) की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। सीटीआई का दावा है कि अगर यह फैसला लिया जाता है, तो उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर १० से १५ रुपये प्रति लीटर तक की एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत मिल सकेगी।
सीटीआई ने टैक्स के इस उलझाव में राज्यों की भूमिका को लेकर भी बेहद तीखी और स्पष्ट टिप्पणी की है। केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में बृजेश गोयल ने साफ शब्दों में कहा है कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी तय करना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन वैट लगाना पूरी तरह से राज्यों का विषय है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि राज्यों ने वैट पर मनमानी करके खुद को जनता की नजरों में विलेन बना लिया है। इस संकट की घड़ी में आम उपभोक्ताओं को राहत देने की जिम्मेदारी अकेले केंद्र की नहीं है, बल्कि राज्यों को भी अपनी जवाबदेही समझते हुए आगे आना होगा। उन्होंने राजनीतिक समीकरणों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि देश के २१ राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं, ऐसे में पेट्रोलियम मंत्री बेहद आसानी से इन राज्यों को वैट कम करने के दिशा-निर्देश जारी करवा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह विकल्प भी दिया कि यदि आगामी तीन महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां सामान्य हो जाती हैं, तो सभी राज्य सरकारें अपनी वैट दरों की दोबारा समीक्षा करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
अपनी इस मांग के समर्थन में सीटीआई ने देश के विभिन्न राज्यों में वैट की दरों में मौजूद आसमानी फर्क के आंकड़े भी उजागर किए हैं, जो टैक्स प्रणाली की विसंगतियों को साफ दर्शाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जहां तेलंगाना में पेट्रोल पर ३५.२० प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में ३१ प्रतिशत वैट के साथ कई अतिरिक्त टैक्स वसूले जा रहे हैं, वहीं दिल्ली में यह दर १९.४० प्रतिशत है। इसके विपरीत, अंडमान-निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेश में महज एक प्रतिशत वैट होने के कारण वहां ईंधन बेहद सस्ता है और डीजल के मामले में भी देश भर में ऐसी ही असमानता बनी हुई है। सीटीआई द्वारा साझा की गई दो दिन पहले की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल की मूल कीमत यानी बेस प्राइस सिर्फ ६६.२९ रुपये और डीजल की ६७.३६ रुपये प्रति लीटर थी। लेकिन केंद्र और राज्यों के भारी-भरकम टैक्स जुड़ने के बाद यह कीमतें आसमान छूने लगती हैं, जिसके कारण पेट्रोल पर कुल टैक्स ४० से ५० प्रतिशत और डीजल पर ३० से ३५ प्रतिशत तक पहुंच रहा है। अब देखना यह है कि वैश्विक तनाव के बीच चौतरफा घिरी सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
