akankshi block water crisis india : नीति आयोग ने देश के जल भविष्य को लेकर एक अहम दस्तावेज जारी किया है, जिसने कई आकांक्षी ब्लॉकों में जल-संकट की गहराई और उससे निपटने की दिशा में जरूरी सुधारों को रेखांकित किया है। “आकांक्षी ब्लॉकों में जल बजट” शीर्षक वाली यह रिपोर्ट बुधवार को नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल द्वारा जारी की गई। रिपोर्ट न केवल जल उपलब्धता और मांग का सटीक वर्गीकरण प्रस्तुत करती है, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत@2047” विज़न के अनुरूप देशभर में सतत और समतामूलक जल सुरक्षा की अनिवार्यता पर भी जोर देती है।

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें 11 राज्यों के 18 आकांक्षी ब्लॉकों का गहन अध्ययन शामिल है। ये ब्लॉक आठ विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फैले हैं, जहाँ जल संसाधनों की चुनौतियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। कहीं जल की कमी जीवन को प्रभावित कर रही है तो कहीं अनियोजित उपयोग के कारण उपलब्ध संसाधनों पर असाधारण दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट इन क्षेत्रों को देश के व्यापक जल-संकट का वास्तविक आईना बताती है।

रिपोर्ट जारी करते हुए डॉ. पॉल ने कहा कि जल प्रबंधन को केवल सरकारी योजना के रूप में नहीं देखा जा सकता; इसे समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर जल तक पहुंच में सुधार सीधे बेहतर आजीविका और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा है।

रिपोर्ट में जल बजट तैयार करने की आधुनिक प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया है। ब्लॉक-स्तर के इस जल बजट में वेब-आधारित प्लेटफ़ॉर्म "वरुणी" का उपयोग किया गया, जो जल मांग का अनुमान लगाने के लिए मानव, पशुधन, कृषि और उद्योग जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करता है। इसके साथ ही यह सतही जल, भूजल, अपवाह और जल स्थानांतरण जैसे सभी संभावित स्रोतों का भी आकलन करता है, ताकि मांग और आपूर्ति का वैज्ञानिक संतुलन स्थापित हो सके।

रिपोर्ट बताती है कि जल बजट अब एक साधारण आंकलन नहीं, बल्कि एक निदान-उपकरण बन गया है, जो भविष्य में जल संकट को गंभीर स्तर तक पहुंचने से पहले ही समाधान सुझाता है। इन ब्लॉकों से मिले आंकड़े न केवल क्षेत्र-आधारित विश्लेषण को मजबूत करते हैं, बल्कि जल उपयोग की समानता और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर जल योजना को अधिक सटीक बनाते हैं।

नीति आयोग ने यह रिपोर्ट GIZ इंडिया के सहयोग से तैयार की है। रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, केरल जल संसाधन विकास केंद्र, GIZ इंडिया तथा अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी विशेषज्ञों ने इस तथ्य पर सहमति जताई कि जब देश डिजिटल शासन और परिणाम-आधारित योजना की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब इस तरह के जल प्रबंधन उपकरण भारत की जल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन को मजबूत करने में आधारशिला साबित होंगे।

रिपोर्ट का निष्कर्ष स्पष्ट करता है कि यदि स्थानीय स्तर पर जल बजट को गंभीरता से लागू किया गया, तो न केवल आकांक्षी ब्लॉकों की तस्वीर बदलेगी, बल्कि भारत आने वाले वर्षों में एक मजबूत जल सुरक्षित राष्ट्र बनने की दिशा में निर्णायक कदम भी उठाएगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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