मुंबई। बरसात के मौसम में सड़कों पर बनने वाले गड्ढे लंबे समय से महाराष्ट्र की सबसे गंभीर समस्याओं में गिने जाते रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं से लेकर ट्रैफिक जाम तक, इन गड्ढों ने न केवल आमजन की परेशानी बढ़ाई है, बल्कि सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। लोक निर्माण विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया है, जो सड़कों की मरम्मत की वास्तविक समय पर निगरानी करेगा और अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजेगा।

राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने सोमवार को इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल महाराष्ट्र में सड़क सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी। उनके अनुसार, "एआई तकनीक न केवल गड्ढों की तत्काल पहचान करने में मदद करेगी, बल्कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी लगातार नजर रखेगी।" उन्होंने बताया कि इस ऐप का उपयोग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में किया जाएगा। सफल परीक्षण के बाद इसे राज्यभर में लागू करने की योजना है।

इस ऐप की विशेषता यह होगी कि यह नागरिकों को भी सड़क की स्थिति से अवगत कराएगा। कोई भी आम व्यक्ति अपने मोबाइल से सड़कों की वास्तविक स्थिति देख सकेगा और यह जान पाएगा कि किस सड़क पर कब और कैसी मरम्मत हुई है। इससे जहां नागरिकों को भरोसा मिलेगा, वहीं अधिकारियों और ठेकेदारों पर भी समय पर और गुणवत्तापूर्ण काम करने का दबाव बनेगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई तकनीक के जरिए गड्ढों का पता लगाना बेहद आसान हो जाएगा। सड़क पर लगे कैमरों और सैटेलाइट डेटा की मदद से ऐप स्वतः ही गड्ढों की पहचान करेगा और उनके आकार तथा गंभीरता का मूल्यांकन कर सकेगा। इसके बाद संबंधित विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिससे अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर पाएंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बार-बार शिकायत करने की समस्या भी खत्म होगी।

मुंबई जैसे महानगर में गड्ढों की समस्या किसी से छिपी नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में हजारों शिकायतें नगर निगम और लोक निर्माण विभाग तक पहुंचती हैं। कई बार गड्ढों के कारण जानलेवा हादसे भी सामने आते हैं। अदालतों ने भी समय-समय पर सरकार और प्रशासन को फटकार लगाई है और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। ऐसे में एआई आधारित निगरानी तंत्र सरकार के लिए एक बड़ा राहत उपाय साबित हो सकता है।

लोक निर्माण विभाग का दावा है कि इस नई पहल से भ्रष्टाचार और लापरवाही पर भी अंकुश लगेगा। अब तक अक्सर ठेकेदारों पर घटिया गुणवत्ता की सामग्री से मरम्मत करने या बिना काम किए भुगतान लेने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन ऐप की मदद से हर मरम्मत की लोकेशन, समय और गुणवत्ता का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे जांच और जवाबदेही तय करना आसान होगा।

हालांकि तकनीक के इस्तेमाल को लेकर चुनौतियां भी सामने हैं। मुंबई जैसे बड़े शहर में सड़कों का जाल इतना विस्तृत है कि हर जगह पर समान रूप से निगरानी करना आसान नहीं होगा। इसके अलावा नागरिकों को इस ऐप के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना भी जरूरी होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को इस दिशा में जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि लोग सक्रिय रूप से इस योजना का हिस्सा बन सकें।

फिलहाल, राज्य सरकार इस ऐप को मुंबई में लागू करके इसकी प्रभावशीलता की जांच करेगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पुणे, नागपुर, और अन्य शहरों में भी जल्द लागू किया जा सकता है। मंत्री भोसले का कहना है कि "यह पहल सिर्फ गड्ढों की मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में एआई का इस्तेमाल सड़क निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया—डिजाइन से लेकर रखरखाव तक—में किया जा सकता है।"

एआई आधारित यह कदम न केवल तकनीकी प्रयोग का प्रतीक है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन को सुरक्षित और आसान बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास है। सड़कें किसी भी राज्य की धड़कन मानी जाती हैं। यदि यह पहल सफल रही, तो महाराष्ट्र में गड्ढों का डर और उनसे जुड़ी परेशानियां अतीत की बात बन सकती हैं।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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