कस्बे की सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से नगर पालिका द्वारा सार्वजनिक स्थानों और मुख्य चौराहों पर लाखों रुपये की लागत से लगवाए गए सीसीटीवी कैमरे वर्तमान में महज शोपीस बनकर रह गए हैं। शहर के अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लगे ये कैमरे तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं, जिसने प्रशासन की मुस्तैदी और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कैमरों के इस निष्क्रिय तंत्र का सीधा लाभ क्षेत्र के अपराधियों को मिल रहा है, जिनके हौसले अब सातवें आसमान पर हैं।

तकनीकी निगरानी के अभाव में भुसावर में चेन स्नैचिंग और बाइक चोरी जैसी वारदातों की बाढ़ आ गई है। शातिर अपराधी सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज के रूप में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण आसानी से फरार होने में सफल हो रहे हैं। साक्ष्यों की इसी कमी ने पुलिस महकमे के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है; पर्याप्त तकनीकी सबूतों के बिना अपराधियों की शिनाख्त और उन तक पहुंचना पुलिस के लिए कड़ी मशक्कत का विषय बन गया है। कई मामलों में तो आरोपी कानूनी खामियों और सबूतों के अभाव का फायदा उठाकर बच निकलने में कामयाब हो रहे हैं, जिससे स्थानीय जनता के बीच असुरक्षा और भय का माहौल गहराता जा रहा है।

स्थानीय निवासियों ने इस बदहाल व्यवस्था पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए नगर पालिका प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को इस लापरवाही को छोड़कर खराब पड़े कैमरों को अविलंब दुरुस्त करना चाहिए और उन्हें पुनः क्रियाशील बनाना चाहिए। सुरक्षा तंत्र का पुनरुद्धार न केवल बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अनिवार्य है, बल्कि आमजन के भीतर प्रशासन के प्रति खोए हुए विश्वास को बहाल करने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

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