श्री विष्णु महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने दी आहुतियां, विश्व शांति के लिए प्रार्थना की
पुरुषोत्तम मास के तहत परमा एकादशी पर हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ में श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और सर्वमंगल के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं।

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर परमा एकादशी के दिन हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। आश्रम परिसर में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय भावनाओं से सराबोर हो उठा।
पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे श्री विष्णु महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर जनकल्याण, विश्व शांति और सर्वमंगल की कामना के साथ आहुतियां अर्पित कीं। कन्हैया मोरयानी, हरीश-निशा आडवाणी, राजा-वर्षा टिक्यानी, जयराम-वर्षा अभिचंदानी, भगवान सिंह चौहान दंपति, नितिन लोहिया दंपति, संगीत बालानी, पल्लवी वच्छानी और अशोक मूंदड़ा सहित अनेक श्रद्धालु यज्ञ में शामिल हुए।
वैदिक आचार्य पंडित सत्य नारायण शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुए यज्ञ अनुष्ठान के दौरान उन्होंने पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मास भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यज्ञ, जप, तप, दान और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण विशेष फलदायी होता है, जबकि परमा एकादशी के दिन किए गए व्रत, पूजन और यज्ञ का पुण्य अनेक गुना बढ़ जाता है। यज्ञ के उपरांत श्रद्धालुओं ने महादेव का अभिषेक भी किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसराम जी उदासीन महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए परमा एकादशी को पुरुषोत्तम मास की प्रमुख एवं अत्यंत फलदायी एकादशी बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में इस एकादशी को पापों का नाश करने वाली तथा मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि के रूप में वर्णित किया गया है। उन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति, सत्संग, सेवा और धर्ममय जीवन को मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताया।
महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसराम जी महाराज ने कहा कि आश्रम में पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने यज्ञ को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि यह केवल व्यक्तिगत कल्याण का माध्यम नहीं, बल्कि समस्त मानवता के सुख, शांति और मंगल की कामना का भी सशक्त साधन है। यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि विष्णु के जयघोष के साथ राष्ट्र की उन्नति, समाज की सुख-समृद्धि और विश्व शांति के लिए प्रार्थनाएं कीं।
आयोजन का समापन आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर आश्रम के संत मायाराम, संत राजाराम, संत गोविन्द राम, संत ईशान राम, संत सुयज्ञ राम, संत केशव राम सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। धार्मिक आस्था, वैदिक परंपरा और लोकमंगल की भावना से ओतप्रोत यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

Pratahkal Bureau
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