राजस्थान में प्रस्तावित सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर वाल्मीकि समाज ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष जोरदार आवाज उठाई है। वाल्मीकि महापंचायत सम्पूर्ण भारत के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष महंत प्रकाश चंद्र नकवाल के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधियों ने सोमवार को भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की मांग की।

ज्ञापन में आगामी सफाई कर्मचारी भर्ती को आरक्षण वर्गीकरण से मुक्त रखते हुए परंपरागत रूप से सफाई कार्य से जुड़े मेहतर-वाल्मीकि समाज के अभ्यर्थियों को 100 प्रतिशत नियुक्तियां देने की मांग की गई। महंत प्रकाश चंद्र नकवाल ने कहा कि वर्ष 2012 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किए गए आरक्षण वर्गीकरण के नियमों से वाल्मीकि समाज के बेरोजगार युवाओं के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भारत सरकार के वर्ष 1989 के अधिनियम के निर्देशों के अनुरूप प्रदेश की नगर पालिकाओं, नगर परिषदों और नगर निगमों में जनसंख्या एवं क्षेत्रफल के आधार पर पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

महापंचायत ने अपने ज्ञापन में कहा कि परंपरागत रूप से सफाई कार्य करने वाले वाल्मीकि समाज के अभ्यर्थियों के लिए अनुभव प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए। साथ ही ऐसे परिवारों में, जहां एक भी सदस्य सरकारी सेवा में नहीं है, रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की मांग की गई। भर्ती प्रक्रिया में विलंब के कारण आयु सीमा पार कर चुके अभ्यर्थियों को कम से कम दो वर्ष की अतिरिक्त आयु छूट देने की भी मांग रखी गई।

ज्ञापन में वर्ष 2012 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं से वंचित उन अभ्यर्थियों का भी उल्लेख किया गया, जिन्हें माननीय उच्च न्यायालय की जयपुर और जोधपुर पीठों से नियुक्ति संबंधी आदेश प्राप्त हो चुके हैं। महापंचायत ने ऐसे मामलों का शीघ्र निस्तारण कर नियुक्तियां देने की मांग की है।

संगठन ने यह भी कहा कि विधानसभा में विभिन्न अवसरों पर कई जनप्रतिनिधियों द्वारा यह मुद्दा उठाया गया था कि सफाई कर्मचारी भर्ती में गैर-समाज के लोग चयनित होने के बाद अन्य प्रशासनिक कार्यों में लग जाते हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त नियमों में संशोधन के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति में वाल्मीकि समाज का प्रतिनिधित्व नहीं होने पर भी महापंचायत ने नाराजगी व्यक्त की।

ज्ञापन में नवगठित नगरपालिकाओं, ग्राम पंचायतों तथा विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्यरत वाल्मीकि समाज के कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी देने अथवा उन्हें नियमित सफाई कर्मचारी पदों पर समायोजित कर स्थायी करने की मांग भी शामिल रही।

महंत प्रकाश चंद्र नकवाल ने कहा कि यदि समाज की मांगों को ध्यान में रखते हुए भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ नहीं की गई तो वाल्मीकि समाज पुनः न्यायिक विकल्प अपनाने के लिए बाध्य होगा। इस दौरान भीलवाड़ा जिला अध्यक्ष लक्ष्मण लोट सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से आए समाज प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में समाजजनों ने ज्ञापन कार्यक्रम में भाग लिया। यह ज्ञापन राज्य में सफाई कर्मचारी भर्ती व्यवस्था और वाल्मीकि समाज के रोजगार संबंधी मुद्दों को लेकर बढ़ती सक्रियता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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