जिले में बिना मान्यता के संचालित विद्यालयों, कॉलेजों और नर्सिंग कॉलेजों को लेकर लाडो सेवा फाउंडेशन ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। फाउंडेशन का कहना है कि एक ओर अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जीवनभर की कमाई शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिना मान्यता के संचालित संस्थान हजारों विद्यार्थियों के सपनों को चुपचाप निगल रहे हैं। वर्षों तक पढ़ाई पूरी करने के बाद जब विद्यार्थियों को पता चलता है कि उनके संस्थान की मान्यता ही संदिग्ध है, तब उनके सपनों, भविष्य और परिवारों की उम्मीदों पर एक साथ संकट खड़ा हो जाता है।

लाडो सेवा फाउंडेशन ने कहा कि यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है, बल्कि हजारों युवाओं के जीवन के साथ किया जा रहा गंभीर अन्याय है। फाउंडेशन के संस्थापक अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि संगठन ने पूर्व में भी बिना मान्यता संचालित विद्यालयों का मुद्दा प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से उठाया था। उस समय कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज भी अनेक संस्थान विद्यार्थियों को प्रवेश देकर उनके भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर छात्र-छात्राएं सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। यह प्रदर्शन केवल डिग्री का नहीं, बल्कि उनके सपनों, भविष्य और परिवारों के संघर्ष का भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी संस्थान के पास आवश्यक मान्यता नहीं थी तो वर्षों तक विद्यार्थियों को प्रवेश कैसे दिए गए और संबंधित विभाग तथा प्रशासन उस समय क्या कर रहे थे। उन्होंने राजस्थान नर्सिंग काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि क्या परिषद बिना समुचित जांच के जयपुर में बैठकर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है या अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों की ओर भी ध्यान दे रही है।

फाउंडेशन ने राजस्थान नर्सिंग काउंसिल की प्रमुख जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि परिषद का दायित्व नर्सिंग कॉलेजों और संस्थानों को मान्यता देना, समय-समय पर भवन, स्टाफ, अस्पताल एवं क्लीनिकल सुविधाओं का निरीक्षण करना, एएनएम, जीएनएम और बी.एससी. नर्सिंग सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्यक्रम और परीक्षाओं का संचालन करना, योग्य नर्सों का पंजीकरण एवं पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करना, नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखना तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए आवश्यकता पड़ने पर उनकी मान्यता निलंबित या समाप्त करने की अनुशंसा करना है।

लाडो सेवा फाउंडेशन का कहना है कि विद्यार्थियों की इसमें कोई गलती नहीं है। उन्होंने संस्थानों और व्यवस्था पर विश्वास करके प्रवेश लिया था। यदि कहीं दोष है तो वह उन संस्थान संचालकों का है जिन्होंने नियमों की अनदेखी की और उन जिम्मेदार अधिकारियों का है जिन्होंने समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की।

फाउंडेशन ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी विद्यालयों, कॉलेजों और नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। बिना मान्यता संचालित संस्थानों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए तथा प्रभावित विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा, “किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था से होती है। यदि शिक्षा ही अव्यवस्था और लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? प्रशासन को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्णायक कार्रवाई करनी होगी।”

लाडो सेवा फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि यदि इस गंभीर विषय पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनजागरण और आंदोलन शुरू करेगा, ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य लापरवाही और लालच की भेंट न चढ़े।

फाउंडेशन ने कहा, “शिक्षा बिकाऊ नहीं, राष्ट्र निर्माण का सबसे पवित्र माध्यम है। हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को लालच और लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। लाडो सेवा फाउंडेशन अंतिम विद्यार्थी को न्याय मिलने तक अपनी आवाज बुलंद रखेगा।”

Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)

अनुभव: 6 माह

परिचय 

अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

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अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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