नगर विकास न्यास (यूआईटी) में पिछले करीब डेढ़ माह से सचिव का पद रिक्त होने के कारण शहर के विकास कार्यों पर गंभीर असर पड़ने लगा है। तत्कालीन सचिव आईएएस ललित गोयल के एपीओ होने के बाद अब तक सरकार द्वारा नए सचिव की नियुक्ति नहीं किए जाने और किसी अन्य अधिकारी को वित्तीय अधिकार नहीं सौंपे जाने से यूआईटी का प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज लगभग ठप हो गया है।

स्थिति यह है कि यूआईटी कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की पेंशन तक अटक गई है। वहीं निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों के करीब 10 करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान भी लंबित पड़ा है। भुगतान नहीं मिलने से नाराज ठेकेदारों ने बुधवार से शहर में चल रहे सभी निर्माण कार्य बंद करने की घोषणा कर दी।

वर्तमान में भदालीखेड़ा मेन रोड, डिवाइडर निर्माण सहित करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। ठेकेदारों का कहना है कि तत्कालीन सचिव के कार्यकाल में तैयार किए गए चेक भी हस्ताक्षर के अभाव में जारी नहीं हो सके, जिससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई है। इसके कारण मजदूरों को भुगतान और निर्माण संसाधनों का खर्च वहन करना कठिन हो गया है।

इसी मुद्दे को लेकर यूआईटी कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने अध्यक्ष चांदमल सोमानी के नेतृत्व में यूआईटी अधीक्षण अभियंता ऋषिकेश मीणा को ज्ञापन सौंपा और बकाया भुगतान नहीं होने पर कार्य बंद करने की सूचना दी। इसके बाद जिला कलेक्टर एवं यूआईटी प्रशासक के नाम कार्यवाहक एसडीओ एवं ओएसडी अरुण जैन को भी ज्ञापन सौंपा गया।

एसोसिएशन अध्यक्ष सोमानी के अनुसार, ओएसडी अरुण जैन ने आश्वस्त किया है कि जिला कलेक्टर द्वारा सचिव की शीघ्र नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा जा चुका है। अब शहर के विकास कार्यों की गति बहाल होने की उम्मीद सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हुई है।

Pratahkal Bureau

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