हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी नृसिंग जयन्ती 30 अप्रैल को धानमण्डी स्थित नृसिंग मन्दिर में आयोजित होगी, जहां बुराई पर अच्छाई की जीत की जीवंत परम्परा एक बार फिर साकार होगी। कार्यक्रम संयोजक मोनू तोषनीवाल ने बताया कि इस दिन मन्दिर प्रांगण को विशेष रूप से सजाया जाता है और आयोजन को ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्वरूप प्रदान किया जाता है।

उन्होंने जानकारी दी कि आयोजन के दौरान हिरण्य कश्यप् का रूप धारण कर गली-मोहल्लों में ताण्डव किया जाता है, जिससे वातावरण में पौराणिक कथा का जीवंत चित्रण दिखाई देता है। सांझ होते ही भक्त प्रहलाद को बचाने के लिए भगवान नृसिंग खम्भ फाड़कर प्रकट होते हैं। इसके बाद भगवान नृसिंग द्वारा भक्त प्रहलाद की रक्षा करते हुए हिरण्य कश्यप का वध किया जाता है। यह परम्परा 200 वर्षों से अधिक समय से लगातार निभाई जा रही है, जो क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

आयोजकों ने सभी धर्मप्रेमी बन्धुओं से निवेदन किया है कि वे सपरिवार इस कार्यक्रम में पधार कर आयोजन का आनंद लें और इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक परम्परा के साक्षी बनें। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज में सत्य और धर्म की विजय का सशक्त संदेश भी देता है।

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Pratahkal Bureau

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