भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के हृदय स्थल इंदिरा मार्केट में पिछले चार दशकों से अधिक समय से अपनी आजीविका चला रहे गुजराती वाघरी देवीपूजक समाज के सामने आज अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। सन 1977 से शहर की सड़कों और फुटपाथों पर पुराने कपड़ों का व्यापार कर अपने परिवार की भूख मिटाने वाले इन सैकड़ों परिवारों की आंखों में आज भविष्य को लेकर गहरा खौफ और अनिश्चितता है। दशकों की मेहनत और शहर की अर्थव्यवस्था में एक छोटे मगर महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस समाज ने अब अपनी रोजी-रोटी की रक्षा के लिए सीधे सूबे के मुखिया का द्वार खटखटाया है। जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में समाज ने स्थानीय रसूखदारों और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है।

इस पूरे विवाद की जड़ में कुछ स्थानीय दुकानदारों का कथित दबाव और पुलिस की लगातार हो रही कार्रवाई बताई जा रही है। एडवोकेट कन्हैया लाल रेगर ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि वाघरी समाज के करीब सैकड़ों परिवार पिछले 48 वर्षों से इंदिरा मार्केट क्षेत्र में व्यापार कर रहे हैं। यह व्यापार न केवल उनकी परंपरा है, बल्कि उनके जीवनयापन का एकमात्र जरिया भी है। आरोप है कि पिछले 8-9 दिनों से कुछ प्रभावशाली दुकानदारों द्वारा उन्हें वहां से बेदखल करने के लिए अनुचित तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। इस खींचतान के कारण स्थिति इतनी विकट हो गई है कि सप्ताह में एक दिन लगने वाले पारंपरिक 'संडे हाट बाजार' में भी इन गरीब व्यापारियों को अपनी फड़ लगाने से रोका जा रहा है, जिससे उनके घरों में चूल्हा जलना भी दूभर हो गया है।

न्याय की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की बार-बार की कार्रवाई और हटाए जाने की धमकियों ने न केवल पुरुषों बल्कि महिलाओं और बच्चों को भी गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से तीन मुख्य मांगें की गई हैं: पहली, इन गरीब व्यापारियों को शांतिपूर्ण ढंग से अपना काम करने के लिए सुरक्षा प्रदान की जाए; दूसरी, पुलिस तंत्र का दुरुपयोग कर प्रताड़ित करने वाले तत्वों पर लगाम कसी जाए; और तीसरी, वर्षों से लग रहे पारंपरिक हाट बाजार को यथावत रखने की लिखित अनुमति दी जाए। समाज ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन और भूख हड़ताल जैसे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

इस महत्वपूर्ण विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट कन्हैया लाल रेगर के साथ राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष, शंकर मेघवंशी, रतन नाथ, राजू वागरी, राजू वशिटा, नीरज मल्होत्रा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता और समाज के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। यह मामला अब केवल फुटपाथ के व्यापार का नहीं, बल्कि दशकों से शहर का हिस्सा रहे एक मेहनतकश समाज के संवैधानिक अधिकारों और उनकी आजीविका के सम्मान का बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मानवीय संकट को सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

Pratahkal Newsroom

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