भीलवाड़ा की नींद उड़ाने वाला खूंखार पैंथर पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली चैन की सांस
जैसे ही उसने पिंजरे में रखे कुत्ते पर हमला करने की कोशिश की, वह खुद पिंजरे में कैद हो गया। अंदर फंसे पैंथर की गर्जन और कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनकर ग्रामीण जाग गए

भीलवाड़ा। जिले के बिजौलिया थाना क्षेत्र में पिछले कई दिनों से ग्रामीणों के लिए दहशत का कारण बना पैंथर आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया। आधी रात को जब गांव के कुत्ते भौंकने लगे तो ग्रामीणों को आभास हुआ कि कुछ असामान्य घट रहा है। वे जब बाहर निकले तो देखा कि डोबिया गांव में लगाया गया पिंजरा बंद हो चुका है और उसके भीतर वही पैंथर कैद है, जिसने कई दिनों से गांव और आस-पास के इलाके में आतंक मचा रखा था। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों ने राहत की गहरी सांस ली।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, डोबिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में यह पैंथर पिछले कई दिनों से घूमता देखा जा रहा था। वह बार-बार आबादी वाले इलाकों में घुसकर मवेशियों का शिकार कर रहा था। अचानक घरों के आसपास उसकी मौजूदगी ने लोगों की नींद हराम कर दी थी। महिलाएं और बच्चे घर से बाहर निकलने से डरने लगे थे और शाम ढलते ही गांव का माहौल सन्नाटे में बदल जाता था। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने तीन दिन पहले गांव में एक पिंजरा स्थापित किया, जिसमें एक कुत्ते को चारे के रूप में रखा गया।
बीती रात पैंथर शिकार की तलाश में डोबिया गांव पहुंचा। जैसे ही उसने पिंजरे में रखे कुत्ते पर हमला करने की कोशिश की, वह खुद पिंजरे में कैद हो गया। अंदर फंसे पैंथर की गर्जन और कुत्ते की भौंकने की आवाज सुनकर ग्रामीण जाग गए और तुरंत मौके पर पहुंच गए। पिंजरे में कैद पैंथर को देखकर लोगों ने चैन की सांस ली और पूरे गांव में खबर तेजी से फैल गई।
सुबह होते ही ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कैद पैंथर को सुरक्षित वन चौकी ले जाया गया। वहां पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। परीक्षण में पैंथर पूरी तरह स्वस्थ पाया गया, जिसके बाद उसे जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
ग्रामीणों के लिए यह घटना किसी राहत से कम नहीं है। कई दिनों से फैले डर और दहशत के बीच पैंथर की गिरफ्तारी ने उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर दिया है। अब बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने राहत की सांस ली है कि उनका गांव एक बार फिर सुरक्षित हो गया है। वहीं वन विभाग का कहना है कि पैंथरों के आबादी क्षेत्रों में प्रवेश की घटनाओं को लेकर वे लगातार निगरानी कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर तत्परता से कार्रवाई की जाएगी।
बिजौलिया इलाके में यह घटना न केवल वन्यजीव प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह एक ही जंगली जानवर पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर सकता है। फिलहाल ग्रामीणों ने चैन की नींद ली है और पैंथर को जंगल में छोड़े जाने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब यह फिर से आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख नहीं करेगा।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
