भीलवाड़ा, 06 जनवरी। राजस्थान के वस्त्र नगरी भीलवाड़ा की कभी धड़कन और सुंदरता का प्रतीक रही मानसरोवर झील आज अपने वजूद की अंतिम लड़ाई लड़ रही है। जो झील कभी शहर के पर्यटन और प्राकृतिक संतुलन का मुख्य केंद्र हुआ करती थी, वह वर्तमान में प्रशासनिक अनदेखी, प्रदूषण और अतिक्रमण के जाल में फंसकर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। इस गंभीर पारिस्थितिक संकट को देखते हुए उपभोक्ता अधिकार समिति (रजि.) ने कड़ा रुख अपनाया है और जिला प्रशासन से इस धरोहर को बचाने के लिए निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है।

मंगलवार को उपभोक्ता अधिकार समिति के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर रणजीत सिंह से मुलाकात की। समिति ने नगर विकास न्यास के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें झील के बिगड़ते हालातों का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी ने कलेक्टर को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि शहर का गौरव मानी जाने वाली यह झील आज गंदगी के ढेर, सघन जलकुंभी और भू-माफियाओं के अवैध कब्जों के कारण विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है।

ज्ञापन में सबसे ज्वलंत मुद्दा झील के पानी में घुलते जहर को बनाया गया है। शहर के नालों का दूषित पानी और भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा सीधे झील में गिर रहा है। इस प्रदूषण के कारण झील के पानी में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से गिर गया है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों की सामूहिक मृत्यु हो रही है। संदिग्ध जहरीले पदार्थों के कारण हो रही इन मौतों ने पर्यावरणविदों और आम नागरिकों की चिंता को चरम पर पहुंचा दिया है। समिति ने आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य हैं। पूरी झील जलकुंभी की मोटी परत से ढकी हुई है, जिसके कारण वहां आम जनता का घूमना-फिरना भी दूभर हो गया है।

प्रशासन को सौंपे गए मांग पत्र में समिति ने स्पष्ट किया है कि अनियंत्रित शहरीकरण और अवैध निर्माणों ने झील के जलग्रहण क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे न केवल झील का दायरा सिकुड़ रहा है बल्कि आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर भी तेजी से नीचे जा रहा है। समिति ने मांग की है कि मछलियों की मृत्यु के कारणों की उच्च स्तरीय जांच हो, पानी की गुणवत्ता की मासिक आधार पर प्रयोगशाला जांच कराई जाए और झील के गहरीकरण के साथ-साथ इसकी नियमित सफाई का एक सघन अभियान छेड़ा जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी के नेतृत्व में संगठन की एकजुटता दिखाई दी। इस अवसर पर केंद्रीय प्रकोष्ठ महिला अध्यक्ष एवं पूर्व सभापति मधु जाजू तथा महिला जिलाध्यक्ष अर्चना दुबे ने भी झील संरक्षण को लेकर महिलाओं और समाज की चिंता को प्रमुखता से रखा। युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए युवा मोर्चा के अंकित सोमानी, हार्दिक सोनी, त्रिदेव मूंदड़ा, अखिल झवर और लादूराम वैष्णव सहित संगठन के अनेक सदस्य उपस्थित रहे। समिति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भीलवाड़ा अपनी इस ऐतिहासिक पहचान को हमेशा के लिए खो देगा। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ज्ञापन के बाद मानसरोवर झील के पुनरुद्धार के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

Pratahkal Bureau

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